Tuesday, February 17

मवाना रोड के पेपर मील मालिक निरंतर धनवान और उनके कारण उत्पन्न प्रदूषण से ग्रामीण बीमार और निर्धन होते जा रहे है

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बताते हैं कि एक फैक्ट्री मालिक ने तो दिल्ली में अरबों रुपये से बनाई कोठियां और की शादी
मेरठ 7 जनवरी (दैनिक केशर खुशबू टाईम्स)। सरकार की पेपर मील उद्योगों को बढ़ावा देने और आसपास के लोगों को नुकसान न हो और नाले-नाली व नदियां प्रदूषित न हो के लिए बनाई गई नीति का उल्लंघन कर मवाना रोड पर स्थित पेपर मील उद्योग निरंकुश होकर जैसी खबरे पढ़ने और सुनने को मील रही हैं उसके अनुसार आसपास के गांवों में रहने वाले गांववासियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और उनकी आर्थिक तंगी का कारण बन रही बताई जाती है।
पूर्व में इसे लेकर ग्रामीणों आदि ने इन पेपर मीलों के खिलाफ आंदोलन धरने किये और केन्द्र सरकार से संबंधित मंत्रालय से भी शिकायत की जिस पर प्रदूषण विभाग के अधिकारी हमेशा ही किसी किसी नाम पर लीपा पोती करते चले आ रहे बताये जाते हैं।
परिणाम स्वरूप मील मालिक दौलतमंद और ग्रामीण बीमारियों से ग्रस्त और आर्थिक तंगी झेलने के लिए मजबूर हैं आज कई नागरिकों का स्पष्ट कहना था कि यह पेपर मील मालिक सरकार की इससे संबंधित नीतियों का उल्लंघन कर प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते दिन दूनी रात चौगुनी रहीश बनते जा रहे हैं। अब इसमंे कितनी सच्चाई है यह तो वो ही या संबंधित जाने लेकिन मौखिक चर्चा है कि एक पेपर मील संचालक ने देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके में अरबों रुपये लगाकर कुछ कोठियां अपने परिवार के सदस्यों के लिए बनाई तो कई का मौखिक रूप से यह भी कहना है कि एक पेपर मील मालिक ने तो लगभग 50 करोड़ रुपये लगाकर अपनी बेटी की शादी की।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी की स्वच्छता बनाई रखने और प्रदूषण मुक्त समाज की नीति का उल्लंघन कर पेपर मील मालिक प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की मीली भगत से वर्तमान में भी प्रदूषण फैलाने और कूड़ा जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं लेकिन नियमों का पालन कराने से संबंध अफसर खामोश क्यों हैं यह तो जिम्मेदार अधिकारी और सरकार ही देख सकती है। फिलहाल जानकारों का कहना है कि अगर अभी भी प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की कुम्भकरणी नींद नहीं टूटी तो ग्रामीणों का यहां रहना मुश्किल हो जाएगा।


अभी कुछ दिन पहले पेपर मील पर ग्रामवासियों ने प्रदर्शन किया था तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने उन्हें नोटिस देकर नियमों का पालन करने की बात कही थी लेकिन उसके बावजूद गत दिवस नगर निगम के कचरे से लदे दो ट्रक खबर के अनुसार बोनजा पेपर मील पर पहुचे पता चलते ही ग्रामीणो ने मौके पर पहुंचकर उसका विरोध किया तथा पेपर मील गेट पर उन्हें पलट दिया। आसपास के गांव नंगला शेखू, कस्तला, बहचौला, ऑरंगाबाद, इंचौली, नंगला मुख्तयारपुर के आदि इकट्ठा हुए लोगों को देख मील प्रबंधन से संबंध दीपक आदि मौके पर पहंुचे और उन्होंने ग्रामवासियों का आश्वासन दिया कि वह यह कूड़ा नहीं जलाएंगे तब मौजूद ग्रामीण मोहित मलिक, दीपक चहल, इंद्रपाल सिंह, अमित तेवतिया आदि ने धरना समाप्त किया इस चेतावनी के साथ कि अगर अब कूड़ा जलाया गया और प्रदूषण फैला तो फिर धरना होगा साथ ही यह भी तय हुआ कि यहां पार्किंग व्यवस्था बनाई जाए। बताते चले कि धरने को भारतीय किसान यूनियन महेन्द्र सिंह टिकैत के पदाधिकारियो ने भी पहुंचकर धरने का समर्थन करते हुए ग्रामवासियों की समस्या का समाधान करने की मांग की खबर के अनुसार ग्रामीणों ने क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद को भी फोन किया था परन्तु बीती शाम तक वह धरनारत किसानों के बीच नहीं पहुंचे। खबर के अनुसार पेपर मील के गेट पर कूड़ा पलटने से आवागमन बंद हो जाने पर पेपर मील के अधिकारियों की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया लेकिन जब तक बोनजा पेपर मील के एमडी दीपक अग्रवाल ने वहां पहुंचकर यह आश्वासन नहीं दिया कि शासन स्तर पर बनने वाले नियमांे का पालन किया जाएगा और प्रतिबंधित मेटिरियल उपयोग नहीं होगा। तब तक मामला शांत नही हुआ।
प्रस्तुति: घुमंतु संवाददाता जनता की राय

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