हर वर्ष हरियाली को बढ़ावा देने और नागरिकों को ताजी हवा उपलब्ध कराने एवं शुद्ध आक्सीजन न मिलने से पैदा होने वाली बिमारियों को रोकने हेतु सरकार द्वारा जो वृक्ष करोड़ों की संख्या में लगवाये जाते है नागरिकों का मानना है अगर वो पूर्ण रूप से सही प्रकार से लग जाते और उनकी देखभाल हो जाती तो पूरे देश में कहीं पेड़ लगाने की आसानी से जगह भी नहीं मिलती। लेकिन कुछ स्थानों को छोड़ दो तो हरे भरे वृक्षों का आभार बड़े स्तर पर दिखाई देता है।
ये तो रही यह बात मगर एक चर्चा हमेशा रहती है कि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से या अनकही सहमति के आधार पर हरियाली प्रदान करने वाले वृक्षों का कटान बड़े बिल्डर लकड़ी माफिया और अपने आलीशान घर बनाने के लिए लोगों द्वारा किया जाता है। और इसे गलत भी नहीं कह सकते क्योंकि यह सैंकड़ो साल से होता चला आ रहा है। कई शताब्दी पहले राजस्थान के एक जिले में बिश्नोई समाज के गुरू भगवान जम्भेश्वर जी महाराज जिन्हें गणेश जी व कृष्ण जी का अवतार भी बताया जाता है उनकी प्रेरणा से 365 महिलाओं ने एक वृक्ष को बचाने के लिए अपनी गर्दनें कटवा दी थी। वर्तमान समय में भी चिपको आंदोलन के प्रेणता सुन्दर लाल बहुगुणा जी द्वारा अपने जीवन में बहुत आंदोलन चलाये गये और वृक्षों को बचाया गया। मगर जैसा कि समय समय पर खबरे सुनने व पढ़ने को मिलती है उसे देखकर नागरिकों की बात से सहमत होना पड़ता है कि वन विभाग के अधिकारी ही घुमाफिराकर पेड़ कटवा रहे है और बड़े लोगों को यह सुविधा उपलब्ध कराकर माल कमा रहे है। अब इसकी सच्चाई तो सरकार ही जान सकती है मगर दिल्ली वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में जो चौकाने वाला खुलासा किया वो महत्वपूर्ण है। पश्चिम वन प्रभाग के उपसंरक्षक ने पर्यावरण कार्यकर्ता भावरिन कंधारी की याचिका पर एक हलफनामा दायर किया। जिसमें पता चलता है कि दिल्ली के बंसतकुंुज के रिछ क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के लिए उपवन संरक्षक की फर्जी अनुमति जारी की। मैं उनकी बात को तो गलत नहीं ठहरा रहा हूं लेकिन अगर पर्यावरण कार्यकर्ता भाररिन कंधारी याचिका दायर नहीं करता तो उनके द्वारा अपने स्तर पर इस मामले में सरकार और उच्च अधिकारियों को समय से विस्तार के साथ इस मामले में अवगत क्यों नहीं कराया। दूसरे इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ एक दिन में नहीं कट गये होंगे तो वन विभाग के अधिकारी आखिर क्या कर रहे तो जो उन्हें इतने पेड़ कट जाने के बारे में कहीं से कोई सुराग व जानकारी क्यों नहीं मिली। क्योंकि पुलिस का भी कहना है कि जो पत्र लिखा गया वो पढ़ने लायक नहीं थी और विवादित स्थान का भी सही पता नहीं था। जिससे स्पष्ट लगता है कि पेड़ कटना और फर्जी अनुमति सब फर्जी हो सकते है। पेड़ों की कटाई वन विभाग के अधिकारियों की अनुमति या उधर से निगाह बचाने के चलते ही हुई होगी।
ऐसे मामलों में कुछ भी हो सकता है क्योंकि जैसे अन्य विभागों के लेकर नागरिक चर्चा करते रहते है कि ज्यादातर अफसर समय से सही काम करते नहीं और लाभ वाले काम मिनटों में निपटाते है वहीं सही लगता है। क्योंकि उड़ीसा प्रदेश के भुवनेश्वर के एक प्रभागीय वन अधिकारी डीएफओ नित्यानंद नायक के यहां हुई छापेमारी में 115 भूखंड और बेताहाशा संपत्ति मिली है वो कहां से आई इससे संबंध खबर के अनुसार ओडिशा में एक प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) नित्यानंद नायक की अकूत काली कमाई सामने आई है। ओडिशा सतर्कता विभाग की कार्रवाई में डीएफओ और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर 115 भूखंड (प्लाट) और चार मंजिला एक इमारत का पता चला है। कैश के अलावा चार पहिया और दो पहिया वाहन भी बरामद हुए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के आधार पर सतर्कता विभाग ने गत रविवार सुबह क्योंझर के केंदु लीफ डिविजन के डीएफओ के कार्यालय समेत उसके साथ दूसरे ठिकानों पर एकसाथ छापे मारे क्योंझर के अलावा अंगुल और नयागढ़ जिलों में ये कार्रवाई की गई, जिसमें 115 भूखंड और चार मंजिला इमारत का पता चला, जो उसने अपनी काली कमाई से बनाए थे। सतर्कता विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 53 भूखंड अकेले डीएफओ और 42 भूखंड उसकी पत्नी के नाम पर रजिस्टर हैं। उसके दो बेटों के नाम पर 16 भूखंड और बेटी के नाम पर चार भूखंड रजिस्टर हैं। साथ हो, अंगुल जिले में एक चार मंजिला इमारत भी डीएफओ से जुड़ी है। इन अचल संपत्तियों की कीमत का आंकलन किया जा रहा है। इसके अलावा डीएफओ के घर से 1.19 लाख रुपये कैश 3 चार पहिया वाहन और 4 दो पहिया वाहन बरामद हुए हैं।
32 साल में बनाई करोड़ों की संपत्ति अधिकारियों ने कहा कि डीएफओ ने 1992 में सरकारी सेवा शुरू की और 2024 तक बन विभाग में अलग- अलग पदों पर रहा। इस दौरान उसने अलग-अलग जिलों में भूखंड और मकान खरीदे। एक अधिकारी ने कहा कि ओडिशा सतर्कता विभाग द्वारा अब तक किसी सरकारी कर्मचारी के कब्जे में पाए गए भूखंडों की यह सबसे बड़ी संख्या है।
डीएफओ साहब के पास मिली इतनी संपत्ति इस ओर इशारा करती है कि देश में हरियाली बढ़ाने के और वन्य जीवों की सुरक्षा के नाम पर वन अधिकारी मालामाल हो रहे है। और दिल्ली की घटना को देखकर यह स्पष्ट हो रहा है कि इनके द्वारा अपनी जिम्मेदारी निभाई नहीं जा रही है।
प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी
वन विभाग के अधिकारियों को सुधारने की है आवश्यकता, इतनी तो हरियाली नहीं बढ़ी जितनी डीएफओ साहब की संपत्ति, दिल्ली के बंसत विहार में पेड़ कटाई का मामला है गंभीर
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