Thursday, May 30

लव जिहाद यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ को रोकने हेतु शादी की उम्र घटाने पर हो रायशुमारी

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विधि आयोग द्वारा सरकार को सलाह दी गई है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत सहमति से यौन संबंधी उम्र में बदलाव ना किया जाए। मेरा विधि आयोग और उससे संबंध न्यायमूर्ति के द्वारा दी गई राय का विरोध करने का कोई इरादा नहीं है। उनकी रिपोर्ट पर निर्णय सरकार को लेना है। जो भी फैसला होगा वो भी सबको मान्य होगा। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता । लेकिन अपने बच्चों को यौन उत्पीड़न और लव जिहाद व औरों के साथ साथ कुछ अपनों की भी बुरी नजर से बचाने के लिए हमें सोचना होगा। इसलिए सरकार को इस बारे में जो निर्णय लेना हो उससे पूर्व आम जनमानस से इस विषय पर रायशुमारी जरूर करानी चाहिए और सबसे बड़ी बात यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चे ही होते है इसलिए स्कूलों में बच्चों को इस बारे में जागरूक करने के साथ साथ उनसे और अभिभावकों से पूछा जाना चाहिए कि शादी और यौन संबंधों के लिए क्या उम्र निर्धारित की जाए जिससे बच्चों को पॉक्सो कानून लगाकर इस उत्पीड़न से बचाया जा सके। मैं विधि आयोग के किसी सुझाव पर टिप्पणी नहीं कर रहा हूं लेकिन समाज की मुख्यधारा से जुड़ा होने और जमीनी ज्ञान के चलते एक बात जरूर कही जा सकती है कि बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो लेकिन साथ ही जल्दी समझदार हो रहे बच्चों की विकसित बुद्धि और यौन अंगों को ध्यान में रखते हुए भी हमें सोचना होगा। क्योकि अब जल्दी ही छोटी उम्र में फिल्मों टीवी कार्यक्रमों वेब सीरीज व अन्य माध्यमों से बच्चे व्यस्क होते जा रहे है। ऐसे में उनकी भावनाएं कोई गलत रूप ना ले इसलिए मेरा अपना मत है कि सरकार यौन संबंधों शादी व ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ ऐसे नियम बनाए कि उन्हें देखकर दूसरा कोई ऐसा अपराध करने की कोशिश ना करे। मात्र एफआईआर से कुछ होने वाला नहीं है। अगर होता तो चोरी रेप छेड़छाड़ डकैती और हत्या की घटनाएं बंद हो गई होती क्योंकि इनमें सजा के बड़े प्रावधान हैं।
हमारी सरकार हर क्षेत्र में सुधार के लिए अभियान चला रही है। तो फिर अपनी भावी पीढ़ी बच्चों के बारे में भी हमें उदार होकर उनकी भावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेने के साथ साथ उन्हंे जागरूक करने की आवश्यकता है। स्कूली पाठयक्रम में हम अच्छी बुरी नजर व छूने व प्यार करने के अंतर को समझा सकते हैं। (सम्पादक रवि कुमार विश्नोई)

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