Friday, March 1

प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने की आड़ में कुछ अपात्र करा रहे है अपना महिमामंडन

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जागेश्वर धाम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने आये शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वरी ने घोटाला करने वाले हिन्दुओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि पैसा किसी के साथ नहीं जाता नेता हो या फिर ठेकेदार सब चोर हो गये है। स्वामी जी सम्मानीय व आदरणीय है वो कुछ भी कह सकते है मगर मेरी इतनी हैसियत नहीं है कि मैं ऐसे शब्दों का उपयोग कर सकूं। मगर स्वामी जी के कथन में सत्यता भरपूर है। क्योंकि व्यापार की बात तो और है देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कठिन तप और प्रबल धार्मिक आस्था के चलते बीती 22 जनवरी को राम नगरी अयोध्या में जो प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ कुछ लोगों ने उसे भी अपने महिमामंडन का माध्यम विभिन्न तरीकों से गलत कमाई के दम पर बनाकर रख दिया। ऐसा कुछ जागरूक नागरिकों का मानना है जिससे मैं भी पूर्ण रूप से सहमत हूं। इसके उदाहरण के रूप में जानकारों के द्वारा अपने शहर में दो प्रकरण दोहराये जाते है। जिसमें प्राण प्रतिष्ठा से कुछ दिन पूर्व वेस्ट एण्ड रोड़ स्थित एक शिक्षा संस्थान के निदेशक राजेश दिवान का नाम लिया जाता है। जिसमें बताते है कि अयोध्या भ्रमण और उसके एक पदाधिकारी का सम्मान करते हुए हर जगह घुसने वाले इस शिक्षा से संबंध व्यक्ति द्वारा एक पदाधिकारी को शॉल ओढ़ाने की फोटो छपवाई गई जबकि चित्र में पता ही नहीं चलता कि वो शॉल किसे ओढ़ा रहे है। दूसरे कई उच्च शिक्षा संस्थानों के संचालक जो पूर्व में प्रदेश सरकार के एक मंत्री के पैसे को लेकर काफी चर्चित हुए थे फिर उनका नाम बलात्कार के प्रयास में भी चमका और हवाला में भी सुगबुगाहट रही। अब उन्हें इतना कुछ होने के बाद निमंत्रण पत्र कैसे मिला ये तो भेजने वाले या पाने वाले ही जाने। लेकिन जागरूक नागरिकों का यह मत है कि ऐसे लोगों को भले ही वो अपनी किसी भी प्रकार की कमाई के दम पर धन और बाहुबली बन बैठे हो। मगर इन्हें आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए था। क्योंकि बाहुबली इसलिए कहा जाता है कि बाईपास स्थित अपने कालेज के निर्माण के दौरान उनके काफी लोगों की पिटाई इनके द्वारा कराई गई थी। अब इन्होंने निमंत्रण कैसे भी मिला हो लेकिन इन्होंने इसे इवेंट बना दिया। क्योंकि निमंत्रण आने के लिए इनका एक सम्मान समारोह इनके कालेज में आयोजित हुआ और इनके खुब महिमामंडन के समाचार छपवाये गये और अब इनके यहां काम करने वाले नौकर छपवा रहे है कि उन्होंने भी अयोध्या स्थित प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया क्योंकि अयोध्या में हुए आयोजनों के जो समाचार और खबरें पढ़ने को मिली उनमें तो इनका दूर दूर तक कहीं चर्चा नहीं था। लेकिन यहां चाटूकार खूब महिमामंडन की खबरे छपवा रहे है। इन दो प्रकरणों को देखकर मुझे भी लगता है कि भले ही आदरणीय शारदा पीठ के शंकराचार्या जी ने जो बोला वो कुछ लोगो को कटु लगता होगा लेकिन बोला बिल्कुल सही। और मेरा भी मानना है कि हमारे लोभ लालच से दूर विश्व के नागरिकों को धर्म और व्यवस्था का अच्छा ज्ञान देने में सक्षम अन्य संतों को भी ऐसे व्यक्तियों जिन्हें जिस श्रेणी के लोगों को शंकाराचार्या जी ने ठेकेदार या चोर की संज्ञा दी गई है अच्छे समाज और रामराज की स्थापना के लिए समय समय पर बेनकाब करते रहना चाहिए। क्योंकि हर कोई तो ऐसा बोल नहीं सकता। इसलिए अब जिम्मेदारी ऐसी ही महान विभूतियों की हो जाती है कि वो जरूरतमंदों की भावनाओं का दमन कर जो लोग धन संपन्न और बाहुबली हो गये उनके बारे में जनता को जागरूक करे। (शहर संवाददाता)

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