Monday, May 20

यूपी एटीएस का खुलासा: बांग्लादेशियों को भारत में बसा रहे थे तीन आरोपी, विदेश से 20 करोड़ रुपये की फंडिंग भी हुई

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सहारनपुर 13 अक्टूबर। देवबंद और वाराणसी एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) की टीम ने बीते बुधवार को देवबंद से पकड़े गए बांग्लादेशी युवकों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। तीनों के खिलाफ लखनऊ में केस दर्ज कराया गया है। जिसके बाद एटीएस की तरफ से प्रेस नोट जारी किया गया। इसमें बताया कि आरोपी मानव तस्करी कर बांग्लादेशियों को भारत में लाकर बसाते थे और इनके फर्जी दस्तावेज भी तैयार कराते थे। इन्हें विदेश से 20 करोड़ की फडिंग भी हुई है। इनके देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के भी सुबूत मिले हैं।

स्पेशल डीजी (कानून ए‌वं व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि एटीएस को खबर मिली थी कि यूपी, दिल्ली, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में एक सिंडीकेट सक्रिय है, जो घुसपैठियों को उनकी पहचान छिपाकर फर्जी भारतीय दस्तावेज उपलब्ध करवा रहा है। इनमें कुछ लोग राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। एटीएस की वाराणसी यूनिट को जानकारी मिली कि गिरोह का एक सदस्य पश्चिम बंगाल से दिल्ली या सहारनपुर जाने की फिराक में है। एटीएस ने लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर उसे धर दबोचा। उसकी पहचान बांग्लादेश के मीरपुर निवासी आदिल मोहम्मद असरफी उर्फ आदिल उर रहमान के रूप में हुई। उसके पास से जाली आधार कार्ड और भारतीय पासपोर्ट बरामद हुआ।

आदिल मोहम्मद असरफी ने एटीएस को बताया कि पश्चिम बंगाल के शेख नजीबुल हक और अबु हुरायरा गाजी ने उसके जाली दस्तावेज बनवाए। दोनों सहारनपुर के देवबंद में रह रहे हैं। एटीएस की टीम ने नजीबुल और अबु को पूछताछ के लिए लखनऊ स्थित मुख्यालय बुलाया। दोनों ने कबूला कि उन्होंने ही आदिल के जाली दस्तावेज तैयार करवाए और उसे आर्थिक सहयोग भी दिया। दोनों ने यह भी बताया कि कुछ समय पहले एटीएस ने बांग्लादेशी मोहम्मद हबीबुल्ला मस्बाह उर्फ नजीब को गिरफ्तार किया था, उसके जाली दस्तावेज भी उन लोगों ने ही बनवाए थे।

नजीबुल व अबु ने कबूला की कुछ समय पहले उन लोगों ने एक बांग्लादेशी महिला की घुसपैठ करवाई थी। दोनों ने बताया कि उनके सिंडीकेट को FCRA अकाउंट्स में बड़ी मात्रा में विदेश से फंडिंग हो रही है। एटीएस को उनसे 20 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग का पता चला है।
बांग्लादेशियों और रोंहिग्याओं को ‌अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कराने वाला सिंडीकेट हवाला के जरिए भारत से भेजी गई रकम को विदेशी फंडिंग दिखाकर वापस भारत ला रहा था। काली कमाई से देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध मस्जिदों का निर्माण भी करवाया जा रहा था। एटीएस द्वारा गिरफ्तार बांग्लादेशी और दो अन्य आरोपितों से पूछताछ में इसका खुलासा हुआ है।

एटीएस द्वारा दर्ज एफआईआर में आदिल उर रहमान अशरफी, शेख नजीबुल हक व अबु हुरायरा गाजी के अलावा सिंडीकेट से जुड़े मोहम्मद राशिद, काफिलुद्दीन, अजीम, अब्दुल अव्वल, अबु सालेह, अब्दुल गफ्फार और अब्दुल्ला गाजी को भी नामजद किया गया है। एफआईआर के मुताबिक सहारनपुर निवासी नजीबुल शेख, मोहम्मद राशिद, दिल्ली निवासी अब्दुल अव्वल और बांग्लादेश निवासी कफिलुद्दीन कुछ लोगों के साथ एक सिंडिकेट बनाकर अलग अलग खातों में मिले धन को कैश करवा कर या हवाला के जरिए मिले विदेशी फंड को घुसपैठियों तक पहुंचाने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल कर रहे थे।

अब्दुल अव्वल फर्जी तारीके से यूपी, दिल्ली, असम व अन्य राज्यों के लोगों के आधार कार्ड धोखे से हासिल कर उनसे ऑनलाइन बैंक खाते खोलता था। फिर उन खातों की डिटेल दिल्ली निवासी अब्दुल गफ्फार को देता था। गफ्फार उन खातों के जरिए विदेश से मिले धन को कैश करवाता था।

वहीं पश्चिम बंगाल निवासी अबु हुरायरा अपने ट्रस्टों के एफसीआरए खातों में आए विदेशी फंड को अब्दुल्ला गाजी और अन्य जरिए कैश करवा कर बांग्लादेशियों व रोहिंग्याओं का सहयोग करता था। अबु व अब्दुल गफ्फार रकम नजिबुल शेख के पास पहुंचाते थे। आदिल पश्चिम बंगाल के बनगांव में छिपकर रह रहा था। वह छह अक्टूबर से यूपी में प्रयागराज व वाराणसी में घूम रहा था।

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