Friday, August 29

जैसे भी हो जनहित में हर हाल में खुलवाया जाए बागपत रोड का लिंक मार्ग

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बड़ी शिद्दत के साथ किये गये प्रयासों के बाद रेलवे रोड से बागपत रोड जाने के लिए राज्यसभा सदस्य डा0 लक्ष्मीकांत वाजपेयी पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल व कैन्ट विधायक अमित अग्रवाल के प्रयासों से लिंक रोड का निर्माण हुआ। इन दोनों मार्गों को जोड़ने वाले 825 मीटर लिंक रोड एक डाक्टर साहब के क्लीनिक के चलते खुल नहीं पा रही है। बताया जा रहा है कि आशीर्वाद अस्पताल व दो दुकानों का अधिग्रहण किया जाना है जिसके लिए अस्पताल प्रबंधक को 76 लाख रूपये का चेक दिया जा रहा है जिसे उनके द्वारा लेने से मना कर दिया गया। जबकि अस्पताल प्रबंधक ने 15 अगस्त तक का समय लिया था लेकिन अपना निर्माण नहीं हटाया और चेक भी नहीं लिया जा रहा। अब व्यवसायी दर पर दोगुनी धनराशि की मांग की जा रही बताते है। मेरा मानना है कि किसी का भी नुकसान या रोजी रोटी पर आंच नहीं आनी चाहिए और क्योंकि भले ही कुछ निर्माण अवैध हो और समाचारों के अनुसार कुछ सेना की जमीन भी दाबी गई हो मगर जो मामला प्यार से निपट जाए वो अच्छा है डाक्टर का नर्सिंग होम भी चलता रहे और लिंक मार्ग भी खुल जाए प्रयास तो यही होना चाहिए। लेकिन जैसा कि लोग कहते है कि अगर किसी ने सरकारी भूमि या नाले या नाली पर गलत तरीके से निर्माण किया है तो उसे तोड़ने के लिए नोटिस की भी आवश्यकता नहीं होती। और जो समाचारों में पढ़ने को मिला है कि इसमें कुछ भूमि सेना की भी घेरी गई बताई जा रही है तो सेना की एक एक गज भूमि के लिए क्या क्या होता है यह सभी जानते है इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि डाक्टर साहब को समझा बुझाकर तैयार करने की कोशिश की जाए और जो संबंधित विभाग दे रहा है और जितना डाक्टर साहब मांग रहे है जनहित में अगर समझौता होता है तो आशीर्वाद अस्पताल के संचालक से समझौता कर समाधान निकलना चाहिए। अगर फिर भी लिंक मार्ग खुलने का रास्ता नजर नहीं आता तो मेरा मानना है कि जनहित से बड़ी कोई बात नहीं है। कुछ लोगो का कहना है कि डाक्टर साहब नर्सिंग होम मेडिकल स्टोर आदि खुलवाकर पहले ही किराये के रूप में काफी पैसा कमा चुके है। इसलिए डा0 प्रदीप बंसल जी को समझा बुझाकर मनाने से बात नहीं बनती है तो सेना और नाले तथा रोड की जमीन पर जो अवैध निर्माण किया हुआ है आशीर्वाद के उस हिस्से को तोड़कर आम नागरिकों का आवागमन सुगम और जाम की समस्या से निजात दिलाई जाए। पता नहीं मेडा के अधिकारी जनहित के इस मुद्दे में क्या सोच रहे है। सरकारी और नियम भी कहता है कि आम आदमी का हित सर्वोप्रिय होने के बावजूद यहां अवैध निर्माण कर्ता और सरकारी सेना की भूमि घेरने वाले को इतनी प्राथमिकता क्यों दी जा रही है कि सारी रोड बनकर तैयार हो जाने के बाद भी 7.9 मीटर चौड़ाई में है उसे तोड़कर आवागमन शुरू क्यों नहीं कराया जा रहा। जबकि दूसरी तरफ खबरों के अनुसार संपर्क मार्ग के लिए उपयोगी जमीन उसके मालिक द्वारा देने की सहमति दे दी गई और मेडा के अधिकारियों ने पैमाईश भी कर ली है। कुल मिलाकर जो भी हो पुलिस प्रशासन मेडा और नगर निगम के अधिकारी जनहित में जैसे भी हो लिंक मार्ग का संचालन जल्द से जल्द शुरू कराये क्योंकि यह माननीय मुख्यमंत्री जी के विकास की भावना में भी निहित है।

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