Sunday, April 14

वर्क आर्डर अशोक लीलैंड का, सप्लाई कर दिये महेंद्रा डंपर, एक वाहन पर निगम अफसरों ने बचाये 10 लाख रुपये

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मेरठ, 08 मार्च (प्र)। लूट का इससे बेहतरीन सबूत और कुछ नहीं मिल सकता है कि वर्क ऑर्डर किस गाड़ी के जारी किये जाते हैं और फिर अंदरखाने मिलीभगत करके कौन-सी गाड़ी की सप्लाई ले ली जाती है। लेकिन जब मामला लाख-दो लाख का नहीं, बल्कि एक ही गाड़ी पर पूरे 10 लाख रुपये जेब में आ रहे हों और साथ ही गाड़ियों की खरीद में कमीशन अलग से मिल रहा हो तो बड़े-बड़ों का ईमान डगमगा जाता है। कुछ ऐसा ही कारनामा इन दिनों नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग में अंजाम दिया गया है।

वर्क ऑर्डर तो अशोक लीलैंड मिनी ट्रक का जारी किया गया, जबकि सप्लाई कर दिये गये महेन्द्रा डंपर ट्रक। अब जब पोल खुली तो इन सभी ट्रकों को ज्वाइंट डिपो में हटाकर भेज दिया गया है। पिछले पांच महीने से करोड़ों की खरीद के यह डंपर धूल फांक रहे हैं। इन ट्रकों की हिफाजत के लिए बाकायदा नगर निगम के दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटियां भी लगाई गई हैं।
सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि करोड़ों रुपये जनता के विकास के लिए इस खरीद में खर्च करने के बाद भी जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों को अपने मुनाफे और कमीशन से मतलब था। लिहाजा मुनाफा और कमीशन लेने के बाद वह भी चुप्पी साधकर बैठ गये हैं। नगर निगम को जनता की सुविधा के लिए बनाया गया था। इस विभाग की स्थापना का उद्देश्य यह था कि जनता को अधिक सुविधाएं मिलें, लेकिन हो रहा है इसके ठीक उलट। मेरठ में विकास के लिए शासन स्तर पर खूब धनराशि भेजी जाती है। लेकिन जिन अफसरों को इस धनराशि के खर्च करने की जिम्मेदारी दी जाती है,
वह धनराशि खर्च करने से पहले इस बात का हिसाब लगाते हैं कि उनको कितना कमीशन मिलेगा। उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं होता है कि जनता की सुविधा के लिए अधिक बेहतर सामान की खरीद हो। उन्हें सिर्फ इस बात की फिक्र होती है कि किस खरीद में उनका कितना फायदा होगा।

नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग ने शहर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए साढ़े चार करोड़ रुपये से दस डंपर ट्रकों की खरीद के लिए ऑर्डर बनाया। इन डंपर ट्रकों का ऑर्डर बनाने से पहले नगर निगम ने विशेषज्ञों से सलाह मश्वरा किया। विशेषज्ञों ने निगम को बताया कि डंपर ट्रक खरीदने से पहले आपको ट्रकों की लोडिंग क्षमता की पूरी जानकारी होनी चाहिए। किस ट्रक में कितना माला लोड किया जा सकता है, माल की लोडिंग कैसे करनी है, माल कहां से कहां पहुंचाना है? आदि, इन सभी ट्रक बिजनेस की खास बातों को ध्यान में रखते हुए यदि यदि खरीद की जायेगी तो वह बेहतर रहेगी तथा नगर निगम को भी इससे फायदा होगा।
नगर निगम ने विषय विशेषज्ञों से सलाह मश्वरा करने के बाद तय किया कि अशोक लीलैंड कंपनी के डंपर ट्रक खरीदे जायेंगे। ट्रकों की अलग-अलग केटेगिरी के अनुसार इनमें भार वहन की क्षमता होती है। नगर निगम ने अशोक लीलैंड के डंपर ट्रक खरीदने के लिए इसलिए और रूचि दिखाई थी, क्योंकि इस कंपनी के डंपर ट्रकों में भार वहन क्षमता 1 टन से लेकर 40 टन से अधिक वजन ढोने तक की होती है।

7 अक्टूबर 2023 को खरीद का वर्क आर्डर जारी
नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग ने विषय व तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह मश्वरा करने के बाद गत वर्ष 7 अक्टूबर 2023 को वर्क ऑर्डर जारी किया। यह वर्क ऑर्डर बैक्सी लिमिटेड कंपनी के नाम जारी किया गया था। कंपनी को हिदायत दी गई थी कि अशोक लीलैंड कंपनी के डंपर ट्रक सप्लाई करके उनकी चेसिस व अन्य पत्रावलियां जैम पोर्टल पर भी डाउनलोड की जायें।

महेन्द्रा ब्लेजो डंपरों की कर दी गई सप्लाई
वर्क ऑर्डर जारी कराने के बाद फाइलों की कागजी खानापूर्ति तो बंद कर दी गई। लेकिन इसके बाद नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग के अधिकारियों ने खेल शुरू कर दिया। बैक्सी लिमिटेड कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके अशोक लीलैंड के स्थान पर महेन्द्रा ब्लेजो डंपर ट्रकों की सप्लाई मंगवा ली गई। यह सभी नये डंपर नगर निगम के दिल्ली रोड वाहन डिपो पहुंचे तथा इन्हें यहीं पर खड़ा भी करा दिया गया।

डिपो पर ही खुली वाहन खरीद में खेल की पोल
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि नगर निगम में वर्क ऑर्डर किसी और चीज के जारी किये जाते हैं और सप्लाई किसी और चीज की ले ली जाती है। जब वर्क ऑर्डर जारी होते हैं। तब तो वह सबके सामने लिखा-पढ़ी होती है। लेकिन जब माल की आपूर्ति लेने की बारी आती है तो पार्षद भी अंजाम हो जाते हैं। और कर्मचारियों को भी इससे कोई सरोकार नहीं रहता है।
सालों से नगर निगम में खरीद का यह धंधा चल रहा है। ऑर्डर के विपरीत सप्लाई में निम्न स्तर के सामाने की आपूर्ति ले ली जाती है। फिर उस मुनाफे को अधिकारी सीधे अपनी जेब के हवाले कर लेते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही कारनामा अंजाम दे दिया जाता। लेकिन डिपो पर ही जब नये डंपर ट्रक आये तो इस खेल की पोल खुल गई।

पोल खुलने पर ज्वाइंट डिपो पर भेज दिये डंपर
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उक्त निविदा में प्रतिभागी समस्त फर्मों द्वारा अपलोड किये गये प्रपत्र ऑनलाईन जैम पोर्टल पर संरक्षित है, जिनका अवलोकन जैम पोर्टल पर भी किया जा सकता है, लेकिन आपूर्ति के महेन्द्रा ब्लेजो डंपर जब सामने खड़े रहे। और अधिकारियों की छिछालेदारी होती रही तो इन डंपरों को चोरी छिपे नगर निगम के दिल्ली रोड वाहन डिपो के सरस्वती लोक में बनाये गये नये ज्वाइंट वाहन डिपो में भेज दिया गया। तब से पिछले पांच महीने से यह ट्रक सरस्वती लोक के ज्वाइंट डिपो में खड़े धूल फांक रहे हैं।

दो कर्मचारियों की हिफाजत के लिए लगाई गई ड्यूटियां
खरीद के इस खेल की पोल खुली तो अब अधिकारी इस मामले की लीपापोती करना चाहते हैं। सब कुछ शांति से निपट जाये। इसलिए इंतजार किया जा रहा है कि कुछ वक्त और निकल जाये। फिर रात गई बात गई की कहावत की तरह इन हल्के महेन्द्रा ब्लेजो डंपरों को सड़क पर दौड़ा दिया जाये, लेकिन पोल खुल जाने के बाद अब अधिकारी भी डरे हुए हैं। इसलिए इन महेन्द्रा ब्लेजो डंपर ट्रकों को सरस्वती लोक के ज्वाइंट डिपो में खड़ा करने के बाद उनकी बाकायदा हिफातत करने के लिए नगर निगम के दो कर्मचारियों की विशेष ड्यूटियां लगाई गई है। जिनको विशेष तौर पर हिदायत दी गई है कि इन ट्रकों का किसी को पता न चले।

पुराने डंपरों की आड़ में खड़े किये गये नये डंपर
नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग के अधिकारियों ने अपने खरीद के इस खेल को छुपाने के लिए जो कुचक्र रचा है। उसमें छोटी-मोटी सुइंर् को छुपाना तो आसान है, लेकिन बड़े डंपर ट्रक को छुपाना अपने आप में बड़ी समस्या है। लिहाजा इन सभी महेन्द्रा ब्लेजो ट्रको को सरस्वती लोक में बिल्कुल अंदर खड़ा किया गया है। बाहर से इन डंपरों का पता न चले। इसलिए इनके आगे नगर निगम के पुराने वाहन भी आड़े-तिरछे खड़े कर दिये जाते हैं। ताकि इनकी आड़ में यह डंपर छुपे रहें।

धूल में पड़े हैं साढ़े चार करोड़ रुपये के नये डंपर
नगर निगम ने शहरवासियों की समस्याओं का निदान कराने के लिए साढ़े चार करोड़ रुपये से दस नये डंपर ट्रकों की खरीद का ऑर्डर जारी किया। डंपर आ भी गये, लेकिन पोल खुलने के बाद अब मामले की लीपापोती चल रही है। पिछले पांच महीने से साढ़े चार करोड़ रुपये की खरीद के यह नये डंपर ट्रक धूल में अटे पड़े हैं। यही हाल रहा तो कुछ समय बाद यह डंपर ट्रक दोबारा से सड़क पर चलाने के लिए फिर नगर निगम से इनकी मरम्मत के नाम पर पैसों का गबन किया जायेगा।

राहत जहां, नगर निगम पार्षदध्कार्यकारिणी सदस्य का कहना है कि अशोक लीलैंड गाड़ियों की सप्लाई ली जानी थी। लेकिन अधिकारियों ने महेन्द्रा की गाड़ियों के ऑर्डर जारी कर दिये हैं। महेन्द्रा की बड़ी गाड़ियों का कोई डीलर व सर्विस सेंटर मेरठ में न होने की वजह से अशोक लीलैंड की गाड़ियों की आपूर्ति होनी थी। हमने फर्म को ब्लैक लिस्टेड करने की शासन से शिकायत की है।
हरिकांत अहलूवालिया, महापौर, नगर निगम ने कहा कि हालांकि महेन्द्रा की गाड़ियां भी उच्च स्तर की होती हैं, लेकिन हमारा साफ कहना है कि जब अशोक लीलैंड की गाड़ियों का वर्क ऑर्डर जारी किया गया है तो फिर महेन्द्रा की गाड़ियां क्यों लें? हमने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कह दिया है कि जिस कंपनी के लिए वर्क ऑर्डर हुए हैं। सिर्फ उनकी ही सप्लाई स्वीकार्य होगी।

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