Friday, August 29

महंगी व ईको फ्रेंडली 2 से 7 फुट की गणेश प्रतिमाऐं हुई स्थापित, मोदक के भोग लगे, विधि विधान से गजानंद व रिद्धि सिद्धि की हुई पूजा

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हर मानव पर अपनी कृपा बरसाने वाले भगवान गणेश जी ने कुबेर महाराज के घर का सारा भोजन खाने के बाद उनका जो घंमड़ तोड़ा तो धार्मिक किदवंतियों के अनुसार जो सुनने को मिलता है उससे यही लगता है कि भगवान सबके है जो उनकी निस्वार्थ भाव से सेवा करता है वो उसे भी फल देते है और साधन संपन्नता के साथ उनकी पूजा करते है भगवान उनका भी ध्यान रखते है। मगर यह है कि घंमड़ दिखावा रहित हो पूजा। मानव जीवन लेने वाले व्यक्तियों को कई प्रकार से परंपराओं को निभाने और उन पर चलने वाले गरीबों का मजाक न उड़ाने सबके साथ उचित व्यवहार करने का संदेश भगवान गणेश जी की पूजा पाठ और उनके प्रेरणास्रोत प्रसंगों से सद्बुद्धि का ज्ञान हमेशा ही होता रहा है। प्रत्येक शुभ कार्य में प्रथम पूजनीय गजानंद की इस मौके पर बनने वाली मूर्तियों के विर्सजन के बाद जल प्रदूषित न हो और आम आदमी हर समस्या से बचा रहे इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा कुछ साल पहले मन की बात में नागरिकों से अपील की गई थी कि देव प्रतिमाऐं प्लास्टर ऑफ पेरिस पीओपी या पेरिस से न बनाई जाए। उसके बावजूद भी जगह जगह उससे मूर्तियां बनती व दिखाई दी। लेकिन भारतीय संस्कृति और आम आदमी की स्वस्थ व स्वच्छ रखने के दृष्टिकोण से अब मिट्टी कपड़े और कागज से भी मूर्तियां बनने लगी है। इस वर्ष सुन्दर मूर्तियां भी बन रही है।
जानकारों के अनुसार हर साल देशभर में गणेश उत्सव के आसपास के तीन माह में दस लाख से ज्यादा प्रतिमाऐं बनती है और इनमें से ज्यादातर प्रतिमाएं पीओपी की होती है। जिस कारण देश के तालाब और अन्य पानी वाले स्थानों पर नदियों में इन 90 दिनों में कई सौ टन प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा रसायनिक रंग जो इसमें शामिल होता है वो पानी में मिल जाता है
आज पूर्ण रूप से पूजा अर्चना और धार्मिक आस्था के साथ पूरे देश में ही नहीं विदेशों में रहने वाले भारतीयों के द्वारा भी हर मानव कहे गणपति बप्पा मोरया जगह जगह लगे सार्वजनिक पंड़ालों मंदिरों व घरों में रिद्धि सिद्धि के साथ आये भगवान गणेश जी महाराज की स्थापना पूरे विधि विधान से हुई। और मोदक और लड्डूओं के भोग लगे तथा सभी ने गणेश चर्तुथी की बधाई व शुभकामनाऐं देते हुए सबकी खुशहाली और अपनों की प्रगति व स्वस्थ रहने की कामना की।
पिछले कुछ वर्षों से जो कहीं कहीं फिल्मी अंदाज में गजानंद की पूजा शुरू हुई और उनमें महंगी महंगी मूर्तियां स्थापित की गई उसे देखते हुए इस बार पंडालों में स्थापित करने के लिए 200 रूपये से लेकर 15 हजार तक की मूर्तियां और उससे आगे सोने चांदी की बेसकीमती सुन्दर व आकृर्षित मूर्तियां भी स्थापित की गई है। इस बार पहली बार प्रदूषण का तिरस्कार करने के लिए जागरूक हो रहे नागरिकों द्वारा दो फीट की मिट्टी से बनी ईको फ्रेंडली मूर्तियों की भारी मांग रही तो बाजार में 3 फीट से 7 फीट तक की मूर्तियां खरीदी और स्थापित की गई।
आज प्रातःकाल से दोपहर 3.44 तक चतुर्थी की तिथि उपस्थित रही जिनमें घने मौहल्लों से लेकर बाहरी क्षेत्रों में बनी भव्य कालोनियों में ढोल नगाड़ों व गाजे बाजे के साथ पूजा पाठ के बीच मूर्तियां स्थापित हुई। और अब लगातार आगे दस दिन तक गणेश पूजा और इसे लेकर सुन्दर व धार्मिक आयोजन होते रहेंगे। बताते चले कि जिस प्रकार से दीपावली रक्षाबंधन भाईदूज जैसे त्योहारों पर देश के बड़े छोटे हलवाईयों के यहां मनपसंद मिठाईयों की खरीदने वालों की भीड़ लगी रहती है उसी प्रकार बीते दिन और आज तमाम प्रमुख छोटे बड़े मिष्ठान विक्रेताओं के यहां गांव हो या शहर मोदक और लड्डू खरीदने वालों का मेला लगा रहा। क्योंकि पूजा पाठ के उपरांत भक्तों को प्रसाद के रूप में इनका वितरण होगा। बताते है कि जब परिवार के पुरूष काम के लिए बाजार जाना शुरू हुए तो घर की महिलाओं ने लड्डू और मोदक खरीदकर लाने की बात कही। पिछले कुछ वर्षों की भांति आज भी बाजारों में मावे बेसन काजू और अन्य बदाम आदि से बने मोदक खूब बिक रहे थे और महंगा होने के बाद भी हर व्यक्ति अपनी अपनी हैसियत के हिसाब से श्रद्धाभाव से अच्छी अच्छी मिठाई खरीद रहा था जिसके पास जैसी आर्थिक स्थिति थी वो उसी के हिसाब से खरीदारी कर रहा था। इसके अलावा शहर में साज सज्जा से संबंध और धार्मिक व्यवस्थाओं में काम आने वाली दुकानों पर खरीदारों की भारी भींड़ नजर आई। भगवान गणेश जी के प्रसाद में चरणामृत और मोदक का प्रसाद बांटने की व्यवस्था हो रही थी तो कहीं 1001 तो कहीं 1100 लड्डूओं का भोग लगाने की तैयारियां होती नजर आई। गजानंद भगवान गणेश और रिद्धि सिद्धि के आवागमन से परिवार में आने वाले खुशहाली और धार्मिक भावनाओं के तहत हर व्यक्ति भगवान गणेश को खुश करने और अपने अराध्य की पूजा पाठ में लगे नजर आये जो घरों में थे वो दिनभर इसी काम में लगे नजर आ रहे थे और जो नौकरी पेशावर थे वो सुबह ही भगवान को शीश नवाकर अपने कार्य स्थल पर पहुंच गये थे।
(प्रस्तुतिः- अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक व पत्रकार)

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