स्वदेशी एक ऐसा मंत्र है जिसकी शुरूआत देश को स्वतंत्रता दिलाने वाले हमारे पूर्वजों ने विदेशी सामान की होली जलाकर और अपने प्राणों की आहूति देकर शुरू किया था। वर्तमान में जैसे जैसे आजादी की हवा परवान चढ़ी देश में हर क्षेत्र में उपयोगी स्वदेशी सामान का उत्पादन होने लगा जो पहले भारी धन खर्च कर विदेश से आता था। आज स्थिति यह है कि हम पिज्जा चॉकलेट, मोमोज जैसी पश्चिमी सभ्यता से जुड़ी खाद्य सामग्री मोटे अनाजों ज्वार बाजरा रागी आदि से बनाने और खाने लगे हैं। अब कई विदेशी कंपनियों के मुकाबले देश में बच्चों में लोकप्रिय हो रही खाद्य सामग्री और आईसक्रीम उपलब्ध होने लगी है। भले ही पूर्वजों द्वारा किए गए आहवान के मुकाबले खादी का प्रचलन इतना ना हुआ हो जितना होना चाहिए था लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम खादी का उपयोग नहीं कर रहे। महंगे खादी वस्त्रों का चलन युवाओं में खूब हो रहा है। लखनउ की चिकन कारी व अमरोहा व वाद्य यंत्र जौनपुर के उनी व वाराणसी मिर्जापुर के दरी कालीन, मेरठ की खेल सामग्री, अलीगढ़ के ताले, अयोध्या की गुड़ की मिठाई, वाराणसी की बनारसी साड़ी, कानपुर के चमड़ा उत्पाद, सहारनपुर, बिजनौर के काष्ठ कला के सामान, हरदोई की हैंडलूम ऐसी वस्तुएं हैं जो देश के साथ दुनियाभर में स्वदेशी के प्रति विदेशियों को भी आकर्षित करते हैं। यह किसी से छिपा नहीं है कि देश की आर्थिक ताकत स्वदेशी वस्तुएं ही हमें आगे बढ़ाएंगी। मेरा मानना है कि जब भी हम त्योहारों पर कुछ खरीदें तो स्वदेशी पर ज्यादा ध्यान दें। क्योंकि इससे हमारे देश के नौजवानों को रोजगार मिलेगा और उनके द्वारा उत्पादित सामान जब विदेशों में भी बिकेगा तो खुशहाली भी आएगी। बता दें कि त्योहारी सीजन में गिफ्ट आईटम के रूप में लखनऊ की मांग बढ़ी है। स्वदेशी के प्रयोग से हर घर में खुशहाली आ रही है। लोकल फॉर वोकल एक ऐसा शब्द है जो हमें बदलाव की ओर प्रेरित करता है। और हमारी कार्यक्षमता को उड़ान देने में सक्षम है। इसलिए आओ मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने और देश के गांवों शहरों में उत्पादित सभी वस्तुओं को उपयेाग में लाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ें। राष्ट्रहित की जो भावना है उसे मजबूत किया जाए।
देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के हसनपुर विनिर्माण संयंत्र से मारूति सुजुकी के पहले इलेक्टॉनिक वाहन ई विटारा को हरी झंडी दिखाने के बाद कहा कि दुनिया में भारत में बने इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को चलाया जाएगा। उन्होंने केवल स्वदेशी वाहन खरीदने का आग्रह किया और कहा कि निवेश कौन करता है यह महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण यह है कि निर्माण भारतीयों की मेहनत का हो। यह वाहन 100 देशों में चलाया जाएगा। आप यह समझ लें कि हमारें देशवासियों के पसीने से बनी वस्तुओं में भारत की मिटटी की खुशबू होगी और 2047 तक विकसित भारत के सपने को पूरा करने में सफल होगा। जहां तक पता चलता है देश में ही नहीं दुनियाभर में रहने वाले भारतीयों का झुकाव भी भारतीय सामानों की ओर बढ़ रहा है। जानकार तो यह भी कहते हैं कि कई विदेशियों का झुकाव भारत में अपने व्यवसाय खड़े करने और उन्हें आगे बढ़ाने की ओर बढ़ रहा है। सरकार भी ऐसे मामलों में वर्तमान समय में बढ़ावा दे रही है युवाओं को अनेक सुविधाएं एक ही काउंटर पर कम ब्याज पर रूपया और सब्सिडी भी दिए जाने की बात सामने आ रही है। कहने का मतलब सिर्फ यह है कि अगर हम स्वदेशी को बढ़ावा देते हुए अपनी सोच को मजबूत बनाकर जहां अपने पूर्वजों की भावनाओं का आदर करेंगे वही देश के मेहनतकश लोगों के लिए खुशहाली के नए मार्ग खुलेंगे। स्मरण रहे कि ब्रिटिश शासन के विरोध में 1905 में 7 सात अगस्त को महात्मा गांधी के आहवान पर ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के आहवान पर स्वदेशी के उपयोग करने का सिलसिला और भावनाएं आम आदमी में पनपने लगी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा जो कहा गया और 50 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाकर हमे धमकाने का प्रयास किया जा रहा है उससे ना तो हम और सरकार दबने वाली है। एक समाचार पढ़ा कि पीएम मोदी ने ना तो टंप का फोन सुना और ना उनसे बात की। इससे यह स्पष्ट है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निर्णय को 120 साल हो चुके हैं। और भारतीयों को अपनी देशभक्ति के साथ स्वदेशी को बढ़ावा देने का पूरा अवसर मिल रहा है। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि 145 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत के पास बल और धन तथा सुविधाएं सबकुछ देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों से उपलब्ध हो रहा है। हमारें यहां पर्यटन की अपूर्व संभावनाएं हैं। अगर हम मिलकर ऐेसे क्षेत्रों की खोज करें तो पता चलेगा कि हजारों ऐसे पर्यटन स्थल मिलेंगे तो विदेशों में शायद ही देखने को मिले। कुल मिलाकर स्वदेशी को बढ़ावा देने एकजुटता से देश को आगे बढ़ाने और देशहित में निर्णय लेने व सरकार को एकता की मजबूती देकर इतना बल देना है कि प्रधानमंत्री ने जो दुनिया में हमारा सम्मान बढ़ाया है उसे सभी आगे बढ़ाते रहे और सम्मान के साथ भारत का नाम लेने और स्वदेशी वस्तुओं को स्वीकार करें और भारतीयों के बल मेहनत के दम पर कार्य सबको दिखाई दें। ऐसा प्रयास वक्त की सबसे बड़ी मांग है।
दोस्तों सब जानते हैं कि एक अंगुली ज्यादा कुछ नहीं कर सकती लेकिन मुठठी बनने पर वो अपने वार से धराशायी कर सकती है। यही स्थिति देश की भी हो सकती है क्योंकि हम सब जाति प्रथा भाषावाद गरीब अमीर की भावना भूलकर मेहनत करने और एक होकर आगे बढ़ने की सोच लें तो बड़े बलशाली हमारे सामने नहीं टिक पाएंगे। स्वदेशी का बल हमें निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा। पूर्व में हम हर क्षेत्र में अग्रणी है लेकिन अपनी सोच को आगे बढ़ाने के मौके नहीं मिलते थे। जो अब मिल रहे हैं। सोशल मीडिया जो हिंदी को सबसे ज्यादा बढ़ावा दे रहा है और योजनाओं का लाभ घर बैठे उपलब्ध करा रहा है उसे आत्मसात कर हम विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी का निर्माण कर उनसे अच्छा उत्पाद खड़ा कर सकते हैं। दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रवादी नागरिकों के संगठन आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के नेतृत्व में कई प्रकार की खाईयां और दूरियां अब देश में भर रही है। आपसी भेदभाव भुलाने का प्रयास कर रहे हैं और स्वदेशी को सबसे ज्यादा बढ़ावा आजादी के बाद संघ द्वारा ही दिया गया। इसलिए जब हमें जरूरत हो तो उसका इतिहास खोलकर सोच को मजबूत कर सकते हैं। अब धार्मिक त्योहार स्वदेशी के संग मनाने का वक्त आ गया है। अब स्वदेशी वस्तुओं से आर्थिक मजबूती और एकता के लिए मिलजुलकर विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी को आत्मसात करें।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सपना और पीएम मोदी का प्रयास करें साकार, विदेशी का बहिष्कार स्वदेशी की भावना को करें आत्मसात; इसी के साथ मनाएं खुशियों से भरे पर्व, सोशल मीडिया और गूगल का लें लाभ
Share.