मेरठ 13 फरवरी (प्र)। महर्षि दयानंद सरस्वती के 201 वें जन्म दिवस के उपलक्ष में डी ए वी पब्लिक स्कूल शास्त्री नगर में 21 कुडिय महायज्ञ का आयोजन किया गया। आचार्य रणधीर शास्त्री एवं नीरज शास्त्री के ब्रह्मत्व में विद्यालय के छात्र छात्राओं, अभिभावको एवं शिक्षिकाओं ने यज्ञ में आहुतियां प्रदान की तथा महर्षि दयानन्द को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। विद्यालय के 10 बालक बालिकाओं ने मंच से सस्वर वेद मन्त्रों का पाठ किया।
भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी मुख्य यजमान रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में महर्षि दयानन्द सरस्वती के महान व्यक्तित्व को नमन के जन्मोत्सव पर करते हुए डीएवी विद्यालय द्वारा बालको को दिये जा रहे संस्कार एवं विचारों की सरहाना की आर्य समाज थापर नगर के प्रधान राजेश सेठी ने उद्बोधन देते हुए बताया महर्षि दयानंद का जन्म गुजरात के टंकारा में फागुन कृष्ण दशमी संवत 1881 तदानुसार 12 फरवरी 1825 को हुआ 13 वर्ष की आयु में शिवरात्रि के अवसर पर उनके मन में सच्चे शिव को जानने की जिज्ञासा जागी जिसके कारण 21 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर सच्चे शिव की खोज में निकल पड़े सन् 1860 उन्होंने मथुरा में स्वामी विरजानन्द जी से शिक्षा प्राप्त कर सत्य सनातन वैदिक धर्म का प्रचार आरंभ किया तथा पाखंडों एवं अंधविश्वास का विरोध करते हुए वेदों की ओर लोटने का आशन किया।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शपथ 1932 को मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की सत्यार्थ प्रकाश जैसा अमर ग्रंथ लिखकर एक नवीन जागरण का सूत्रपात किया। उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं से समाज में नव जागरण हुआ था उन्हीं की प्रेरणा से अनेक लोग देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में बलिदान हुए एवं राष्ट्र को स्वतंत्रता प्राप्त हुई 30 अक्टूबर 1983 को जोधपुर में विष दिये जाने के कारण उनका देहांत हुआ। हमें सदैव उनके जीवन एवं कार्य से प्रेरणा लेकर अपनी प्राचीन संस्कृति को बढ़ाने का कार्य करना चाहिए। उनकी स्मृति में ही लाहौर में डी ए वी कालिज संस्था की स्थापना की गई थी। कार्यक्रम में क्षेत्रीय अधिकारी डॉक्टर अल्पना शर्मा ने महर्षि दयानन्द सरस्वती को नमन करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉक्टर अर्पणा जैन, डॉ विरेन्द्र आर्य, अंकित सिंहल उपस्थित रहे।
