मेरठ, 28 अगस्त (प्र)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में दिव्यांग शोध छात्र मोहित रस्तोगी के साथ हुई अभद्रता और मारपीट की घटना के विरोध में आज मोहित रस्तोगी अपने साथियों हितेश रस्तोगी और अमित शर्मा के साथ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट आदेश प्रधान ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र लिया। इस पत्र में न केवल 27 अगस्त की घटना का पूरा ब्यौरा दिया गया, बल्कि पुराने मामलों की भी चर्चा करते हुए न्याय और सुरक्षा की मांग रखी गई।पत्र सौंपने से पहले ही एसएसपी कार्यालय के बाहर दिव्यांग छात्रों में बेचैनी और गंभीरता साफ नजर आ रही थी। मोहित रस्तोगी व्हीलचेयर पर बैठे थे, उनकी आँखों में गुस्सा कम और पीड़ा अधिक झलक रही थी। वे उस घटना को याद करते हुए बार-बार कह रहे थे कि यह अपमान केवल उनका नहीं बल्कि हर उस छात्र का है जो विश्वविद्यालय में सम्मानपूर्वक पढ़ाई करना चाहता है। जब एसपी महोदय से मुलाकात हुई तो मोहित ने पत्र उनके हाथ में सौंपा और कहा कि यह केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि पूरे छात्र समुदाय की व्यथा है।
पत्र में विस्तार से लिखा गया था कि 26 अगस्त की सुबह विभागीय कार्य हेतु विश्वविद्यालय पहुँचे मोहित के साथ प्रोफेसर दुष्यंत चौहान ने गाली-गलौज की, उनकी दिव्यांगता का उपहास उड़ाया और धक्का-मुक्की तक कर डाली। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि इस घटना से मोहित रस्तोगी मानसिक रूप से आहत हैं और अब विश्वविद्यालय का माहौल उनके लिए असुरक्षित प्रतीत होता है। आदेश प्रधान ने कहा कि यह घटना केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि शिक्षा के मंदिर में मानवीय मूल्यों और संविधानिक अधिकारों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाने जैसा है। आदेश प्रधान ने कहा कि प्रोफेसर चौहान का नाम पूर्व में भी कई विवादों और हिंसक घटनाओं से जुड़ा रहा है। छात्रों के साथ मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएँ पहले भी हुईं और उनकी शिकायतें पुलिस और प्रशासन तक पहुँचाई गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। उन शिकायतों को हमेशा दबा दिया गया और दोषी को संरक्षण दिया गया। यही कारण है कि जब 26 अगस्त को मोहित रस्तोगी पर हमला हुआ तो छात्रों का आक्रोश और गहरा हो गया। सौंपे गए पत्र में यह चेतावनी भी दर्ज थी कि यदि इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र समुदाय सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष करेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा का मंदिर गुंडागर्दी का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। यह पत्र दरअसल एक दस्तावेज है जो छात्रों के धैर्य, आक्रोश और न्याय की उम्मीद तीनों को एक साथ सामने लाता है।
पत्र सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हर्ष ढाका ने भावुक स्वर में कहा कि वह शिक्षा प्राप्त करने आए हैं, अपमान और हिंसा झेलने नहीं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग होना कोई अपराध नहीं और किसी को भी इस आधार पर अपमानित करने का अधिकार नहीं है। हितेश रस्तोगी ने कहा कि यह लड़ाई केवल मोहित की नहीं बल्कि हर छात्र की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने हमेशा दोषियों को बचाने का काम किया और इसीलिए अब पुलिस की भूमिका और भी अहम हो गई है। अमित शर्मा ने कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और उग्र होगा और अदालत का दरवाजा खटखटाने में भी छात्र पीछे नहीं हटेंगे।