Friday, August 29

75 वर्ष काम करने की सीमा, हर परिवार में हो तीन बच्चे, हिन्दू मुस्लिम एकता को मजबूत करने का संदेश भी दिया मोहन भागवत ने

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राम मंदिर एक मात्र ऐसा आंदोलन था जिसका संघ ने सर्मथन किया था। काशी मथुरा आंदोलन को संघ का सर्मथन नहीं है। उक्त शब्द संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा बीते दिनों दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित अपनी तीन दिवसीय व्याख्यान माला के अंतिम दिन कुछ सवालों के जवाब में स्पष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि आरएसएस के स्वयं सेवक ऐसे आंदोलन में शामिल होने के लिए स्वतंत्र है। राम मंदिर एक मात्र ऐसा आंदोलन रहा जिसका आरएसएस ने समर्थन किया यह अब ऐसे किसी आंदोलन में शामिल नहीं होगा। बताते चले कि यह व्याख्यान माला आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर आयोजित की गई थी। संघ प्रमुख का कहना था कि जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नये भाजपा प्रमुख के चयन में संघ की कोई भूमिका नहीं है। हम सरकार को सलाह देते है फैसलों में दखलअंदाजी नहीं करते। मोहन भागवत जी ने कहा कि भाजपा और संघ में कुछ बिन्दुओं पर मतभेद हो सकते है मनभेद नहीं। भागवत जी का कहना था कि मैंने 75 वर्ष में रिटायर होने की बात कभी नहीं कही। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष का होने पर भी संगठन शाखा को चलाने के लिए कहा जाएगा तो करना पड़ेगा। स्मरण रहे कि आगामी 11 सितंबर को मोहन भागवत जी 75 वर्ष के हो रहे है।
उनका कहना था कि हम जीवन में किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार है मगर जब तक संघ चाहेगा तब तक काम करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया टिप्पणी में रिटायरमेंट की बात नहीं थी यह तो आरएसएस के दिवंगत प्रमुख मोरोपंत पिंगले के एक मजाकिया कथन का उल्लेख था।
जनसंख्या असंतुलन से जुड़े एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि यह एक चिन्ता का विषय है मगर हर भारतीय परिवार में तीन बच्चे होने चाहिए। अमेरिकी टैरिफ पर संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि संघ सरकार को यह नहीं बताएगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल ट्रंप से कैसे निपटा जाए। उन्हें पता है कि क्या करना है हम उसका सर्मथन करेंगे। किसी भी मित्रता पर दबाव नहीं होना चाहिए।
संघ प्रमुख की यह स्पष्ट बातें ऐसे में सामने आई जब संभल निवासियों ने योगी आदित्यनाथ से हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की और यहां हो रहे हिन्दुओं के पलायन से घट रही इनकी संख्या पर बात की।
संघ प्रमुख का पद संभालने के बाद से अगर देखा जाए तो भाईचारे साम्प्रदायिक सौहार्द्र और राष्ट्रीय एकता तथा कुछ सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए संघ प्रमुख द्वारा किये जा रहे कार्यों के संदर्भ में संघ प्रमुख के इस कथन को देखा जा सकता है कि मुस्लिम मानसिकता में बदलाव का हिन्दु समाज को आतुरता से इंतजार है गलतफहमी दूर कर साजी संस्कृति विरासत के लिए साथ आये। उनका यह कहना कि इस्लाम नहीं रहेगा यह हिन्दु सोच नहीं है। जितनी प्रेरणा राम प्रसाद बिस्मिल से उतनी ही अशफाक उल्लाखां से मिलती है। हम काशी मथुरा आंदोलन को समर्थन नहीं करते है। राजनीतिक क्षेत्रों में पिछले काफी समय से उम्र को लेकर चले आ रहे चर्चाओं को भी उनके द्वारा यह कहकर कि 75 की उम्र में रिटायर नहीं होऊंगा उनके द्वारा इस बिन्दु पर विराम लगाया गया। तो हिन्दुओं की घटती संख्या व पड़ोसी देशों की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उनका कथन महत्वपूर्ण कि हर भारतीय परिवार में तीन बच्चे होने चाहिए। पिछले कुछ माह से कई मौकों पर सरकार और संघ परिवार में खींचतान की सामने आ रही बात को विराम देने हेतु संघ प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि फैंसले में दखल नहीं हम सलाह देते है हमारे में मनभेद नहीं है।
वर्तमान परिस्थितियों में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चर्चा कर सरकार के हर कदम में सहयोग की बात कहकर एक बात से मजबूती शासन और सरकार चलाने हेतु दी गई। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि जिस हिसाब से संघ प्रमुख मोहन भागवत जी काम कर रहे उससे समाज में एकता हिन्दु मुस्लिम का भेद मिटाने और बढ़ती जनसंख्या से होने वाले नुकसानों को रोकने हेतु तीन बच्चों की बात कही गई जो अपने आप में महत्वपूर्ण है। मोहन जी तो कह रहे है कि 75 वर्ष नहीं 80 में भी काम करूंगा इतनी अच्छी सोच रखने वाले समाज सुधारक के रूप में चर्चित मोहन भागवत जी जब तक चाहे वो संघ का मार्गदर्शन और उसके माध्यम से हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए काम करते रहे दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्रभक्तों के संगठनों में शुमार संघ के प्रमुख की यह बात बड़ी है कि हम किसी पर हमले में विश्वास नहीं रखते है। और उनके 75 वर्ष के कथन से अब उन्हें भी राहत मिलेगी कि जिन्हें आगे काम करने का मौका मिल सकता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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