मेरठ, 27 जनवरी (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। गीता आश्रम मंदिर, तिलक रोड पर हिंदू समाज के तत्वावधान में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10.30 बजे ध्वजारोहण के साथ किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने राष्ट्र एवं धर्म के प्रति एकजुटता का संकल्प लिया।
ध्वजारोहण के पश्चात मंदिर परिसर में सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने सामूहिक रूप से श्रीराम के चरित्र का स्मरण करते हुए भक्ति भाव से सहभागिता की। इसके उपरांत आयोजित हिंदू सम्मेलन पर बौद्धिक सत्र में वक्ताओं ने हिंदू संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक समरसता एवं संगठन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
हिंदू सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित बौद्धिक सत्र में वक्ता कैलाश पंडित जी ने हिंदुत्व का दर्शन दिया।
मनोज विभाग शारीरिक शिक्षण प्रमुख आरएसएस ने संघ की 100 वर्ष की यात्रा से समाज को अवगत कराया इसके पश्चात अशोक जी प्रांत सह सेवा प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु श्पांच परिवर्तन्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज का सशक्तिकरण इन पांच मूलभूत परिवर्तनों को अपनाने से ही संभव है। प्रथम परिवर्तन के रूप में सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा गया कि जाति, वर्ग एवं भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट समाज का निर्माण ही राष्ट्र की मजबूती का आधार है।
द्वितीय परिवर्तन कुटुंब प्रबोधन का है, जिसमें परिवार को संस्कारों की प्रथम पाठशाला बताते हुए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया गया। तृतीय परिवर्तन स्वदेशी अपनाने से संबंधित है, जिसके माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने की बात कही गई। चतुर्थ परिवर्तन पर्यावरण संरक्षण का बताया गया, जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, स्वच्छता एवं हरित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
पंचम परिवर्तन नागरिक कर्तव्य एवं सामाजिक सहभागिता का है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए जागरूक रहने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन पांच परिवर्तनों को अपने जीवन में आत्मसात कर ही एक सशक्त, संगठित एवं संस्कारित हिंदू समाज का निर्माण किया जा सकता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में नवीन राजीव राकेश जैन विकास संजीव ऋषभ कमल प्रमोद शौर्य विवेक लालाराम शिवम सूरज आदि का सहयोग रहा
