वाराणसी 29 अगस्त। काशी में श्रद्धालुओं की 5 किमी लंबी कतार लगी हुई है। लोलार्क कुंड की आठों गलियां फुल हैं। करीब 2 लाख 40 घंटे से कतार में लगे हुए हैं। संतान प्राप्ति की कामना के लिए देश-विदेश से पहुंचे लोगों ने गुरुवार आधी रात से लोलार्क कुंड में स्नान शुरू किया। अधिकांश लोग उदया तिथि की मान्यता के अनुसार सूर्योदय के बाद कुंड में डुबकी लगाने पहुंचे। ऐसी मान्यता है, कि कुंड में स्नान करने और लोलार्केश्वर महादेव की पूजा करने से संतान की प्राप्ति और तमाम रोगों से मुक्ति मिलती है.
सबसे पहले 51 डमरूओं के वादन से आरती की गई और फिर धीरे-धीरे श्रद्धालुओं का जत्था स्नान करने के लिए पहुंचने लगा। एक दिन पहले से ही बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, बंगाल, नेपाल के अलावा काशी के आसपास के जिलों से लोग पहुंच चुके हैं।
मान्यता है, कि भगवान सूर्य ने कई वर्षों तक यहां पर तपस्या की और शिवलिंग स्थापना की थी. यह शिवलिंग आज भी मौजूद है. इसके साथ ही यह भी कहा जाता है, कि भगवान सूर्य के रथ का पहिया फंस गया था, जिसकी वजह से इस कुंड का निर्माण हुआ.
शिलापट्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल स्थित बिहार ट्रस्ट के राजा चर्म रोग से पीड़ित थे और निःसंतान थे. यहां स्नान करने से न केवल उनका चर्म रोग ठीक हुआ, बल्कि उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. इसके बाद उन्होंने इस कुंड का निर्माण कराया था. इस कुंड को सूर्य कुंड के नाम से भी जाना जाता है.
पुरोहित अविनाश पांडेय ने बताया कि आज लोलार्क छठ है. दूर-दूर से लोग इस कुंड में नहाने के लिए आते हैं. ऐसी मान्यता है, कि आज के दिन स्नान करने से संतान और पुत्र की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि लोग स्नान कर रहे हैं. कुंड में नहाते समय पति-पत्नी साथ रहते हैं. हाथ में एक फल लेकर स्नान किया जाता है. स्नान के बाद शरीर पर जो भी वस्त्र रहता हैं, उसे यहीं त्याग दिया जाता है.
जिस फल को लेकर दंपत्ति स्नान करता है, जीवनभर उस फल का सेवन वर्जित होता है. लोलार्क कुंड में स्नान करने पहुंची श्रद्धालु मधु दुबे ने बताया कि आज कुंड में स्नान किया. भगवान से श्रद्धा भाव से प्रार्थना किया कि जो भी मनोकामना है, वह भगवान से मांगा है.