मेरठ 19 मार्च (प्र)। आज से चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का आरंभ होने जा रहा है। इस बार माँ दुर्गा पालकी पर आगमन करेंगी। बता दे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा का पालकी पर आगमन बहुत शुभ नहीं माना जाता। ज्योतिष गणना के अनुसार यह संकेत देता है कि समाज और देश में कुछ अशांति अस्थिरता या चुनौतियां बढ़ सकती हैं जन धन हानि या संघर्ष का संकेत माना जाता है।
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद मेरठ के चैप्टर चेयरमैन ज्योतिषाचार्य आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि की शुरूआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस बार हिन्दी वर्ष 12 नहीं 13 महीनों का रहेगा क्योंकि संवत् 2083 में एक अधिकमास भी है। इस साल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026, गुरुवार को सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 मार्च 2026, शुक्रवार की सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। 19 मार्च को सूर्योदय के बाद प्रतिपदा तिथि लग रही है और अगले दिन सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही है। इस कारण प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है। ऐसे में 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरूआत मानी जाएगी।
27 मार्च तक होंगे चैत्र नवरात्र
पंचाग के अनुसार इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च की सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसी वजह से 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरूआत मानी जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले ये पर्व 27 मार्च को रामनवमी के साथ खत्म होगा।
कलश स्थापना विधि
नवरात्रि में कलश को ‘ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। कलश हमेशा मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के दाई ओर स्थापित किया जाना चाहिए। कलश स्थापना के समय दिशा का ध्यान न रखने पर वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें पूजा करना अत्यंत फलदायी होगा।
अभिजीत मुहूर्त मे घट स्थापना करना शुभफलदायी
चैत्र नवरात्रि 2026 में इस बार घट स्थापना के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त दोपहर 05 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त बन रहा है, जो कलश स्थापना के लिए शुभ है। इसके अलावा दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक लाभ चौघड़िया होने से ये समय सबसे उत्तम रहेगा।
ईशान कोण में ही रखें मां की चौकी, होगा सकारात्मक ऊर्जा का संचार
शास्त्रों के अनुसार, देवी दुर्गा की चौकी हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित करनी चाहिए। यह दिशा देवताओं की मानी जाती है और यहां से सकारात्मक ऊर्जा का संचार सबसे अधिक होता है। चौकी स्थापित करने के बाद उस पर हमेशा लाल या पीला स्वच्छ कपड़ा ही बिछाएं।
संवत 2083 में ज्येष्ठ मास में आएगा अधिकमास
इस साल 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ मास का अधिकमास रहेगा यानी ज्येष्ठ दो महीनों का रहेगा। इस वजह से संवत 2083 13 महीनों का होगा। संवत्सर का नाम रौद्र है। बृहस्पति ग्रह राजा और मंगल ग्रह मंत्री है। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं।
