मेरठ 30 मार्च (प्र)। स्वाट टीम और लोहियानगर थाना पुलिस ने पंजाब और मुरादाबाद से मोबाइल टावरों से चोरी हुई 74 बेस बैंड यूनिट (बीबीयू) का खुलासा करते हुए एक आरोपी जाकिर कॉलोनी निवासी शाहरुख मलिक को गिरफ्तार किया है। चार आरोपी अभी फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है। इनके कब्जे से 237 बीबीयू उपकरण बरामद किए गए हैं। इनमें दो जियो और 235 एयरटेल कंपनी के हैं। 156 कॉपर के कार्ड भी बरामद किए हैं। बरामद बीबीयू की कीमत 15 करोड़ 40 लाख रुपये आंकी गई है। बीबीयू निकालते ही मोबाइल टावर का नेटवर्क ठप हो जाता है। अब तक करोड़ों रुपये की चपत गैंग लगा चुका है। इसको आरोपी विदेशों में बेचा करते थे। इसका इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों में तो नहीं हो रहा था, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस लाइन में रविवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएसपी अविनाश पांडेय ने इसकी जानकारी दी। बताया, रॉयल कमांड प्रोटेक्शन ग्रुप के सिक्योरिटी सुपरवाइजर बागपत जनपद के बड़ौत थाना क्षेत्र के गांव हिलवाड़ी निवासी प्रवेंद्र कुमार तोमर ने सूचना दी कि इंडस टॉवर एयरटेल का मोबाइल नेटवर्क का कार्य देखती है। पंजाब के विभिन्न शहरों और मुरादाबाद से लंबे समय से बीबीयू उपकरण चोरी हो रहे थे। इसकी शिकायत नेशनल हेड नोडल सिक्योरिटी के वाइस प्रेसिडेंट ने एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसएसपी अविनाश पांडेय से की।
एसएसपी ने स्वाट टीम को जांच में लगाया। एसएसपी के अनुसार, मुरादाबाद में दो और पंजाब में 72 मुकदमे बीबीयू चोरी की रिपोर्ट दर्ज है। यह गैंग लंबे समय से चोरी की वारदात को अंजाम दे रहा था। एसएसपी ने बताया कि जब बीबीयू अधिक संख्या में चोरी होने लगे तो एयरटेल की तकनीकी टीम ने बैठक की। उन्होंने इसमें जीपीएस डिवाइस लगाई। जीपीएस के माध्यम से टीम आरोपी शाहरुख का पीछा करते-करते लोहियानगर तक पहुंच गई। इसके बाद नेटवर्क टूट गया और शाहरुख का पता नहीं चल सका। इसके बाद एयरटेल की टीम ने सूचना दी। स्वाट टीम और लोहियानगर थाना पुलिस ने छानबीन कर जाकिर कॉलोनी में आरोपी के घर से उसे गिरफ्तार कर लिया।
चार साथियों के साथ मिलकर की वारदात
एसएसपी के अनुसार, आरोपी ने बताया कि उसने अपने चार अन्य साथियों के साथ मिलकर ये वारदात की। बाकी चार आरोपी मुजफ्फरनगर और बागपत के रहने वाले हैं। इनकी तलाश में पुलिस लगी हैं। एसएसपी ने बताया कि 15 करोड़ 40 लाख रुपये के बीबीयू बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि चीन समेत कई देशों में आरोपी इन्हें बेचा करते थे। आरोपी देशविरोधी गतिविधियों से तो जुड़े हुए है या नहीं, इस पर भी तकनीकी टीम काम कर रही है।
एसएसपी अविनाश पांडेय ने एयरटेल और जियो कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करके बताया कि बीबीयू एक तरह का मदर बोर्ड है। यह टावर में लगाया जाता है। यदि इसे टावर से निकाल लें तो पूरा नेटवर्क धड़ाम हो जाता है। न तो कॉल लगती है और न ही किसी तरह के मैसेज आते हैं। यह डिवाइस चोरी होने के बाद इसको कंपनी के द्वारा तुरंत टावर पर दूसरा लगाया जाता था। इसके बाद ही नेटवर्क शुरू हो पाता था। एक बीबीयू की कीमत साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपये तक होती है। एक तकनीकी टीम बुलाई गई है। उसकी मदद से आगे की छानबीन की जाएगी। एसएसपी ने बताया कि अभी तक बीबीयू चोरी के 60 मुकदमेे कनेक्ट हो गए हैं। पंजाब और मुरादाबाद की पुलिस से भी संपर्क हो गया है। जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बीबीयू चोरी होते ही बज जाता था अलार्म
इस मुकदमे के वादी प्रवेंद्र तोमर ने बताया कि जब भी बीबीयू चोरी होता था, तो कंपनी के नजदीकी कार्यालय में अलार्म बजता है। कर्मचारी को पहुंचने में आधा घंटे का समय लग जाता है, तब तक आरोपी बीबीयू चोरी करके फरार हो जाते है।
