Thursday, April 2

किडनी कांड में सीएमओ ने अल्फा हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर किया जवाब तलब

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मेरठ 02 अप्रैल (प्र)। कानपुर में पकड़े गए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में मंगलपांडेनगर स्थित अल्फा हॉस्पिटल का नाम उजागर होने से यह अस्पताल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। गत वर्ष नवंबर में एक मरीज द्वारा की गई इलाज का अत्याधिक बिल वसूली की शिकायत पर उक्त अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके साथ ही सीएमओ ने इस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था, हालांकि कुछ दिनों बाद लाइसेंस को बहाल कर दिया गया था। छात्र नेता विनीत चपराना ने इस मामले की एसआईटी गठित कर जांच कराने की अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने मांग की। अब सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने किडनी रैकेट के तार इस अस्पताल से जुड़ने पर नोटिस जारी कर इस जवाब तलब किया है। तीन दिन में जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, कानपुर में किडनी रैकेट पकड़ा गया। इस कांड में मंगलपांडे नगर स्थित अल्फा हॉस्पिटल का नाम पुलिस जांच में उजागर हुआ।

आरोप है कि मेरठ के अफजाल नाम का डाक्टर किडनी की व्यवस्था कराता था। इसके लिए वह भोले भाले लोगों को पैसे का लालच देकर उनकी किडनी कानपुर के अस्पताल में निकलवाकर मोटी कमाई करता था। पुलिस रिपोर्ट में उजागर हुआ कि डा. अफजाल का संबंध अल्फा हॉस्पिटल से है, हालांकि अस्पताल प्रबंधन इससे साफ इंकार कर रहा है और कह रहा है कि वह किसी अफजाल नाम के चिकित्सक को नहीं जाते खास बात है कि नवंबर, 2025 में अल्फा अस्पताल में गाजियाबाद के एक मरीज द्वारा लकवे के इलाज के लिए कई गुना अधिक पैसे वसूली का आरोप लगाते हुए सीएमओ से शिकायत की थी। इस मामले में उक्त अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाई थी, जिसमें आरोप सिद्ध नहीं हो पाए थे। इसके बाद सीएमओ ने उक्त अस्पताल का लाइसेंस बहाल कर दिया था। छात्र नेता विनीत चपराना ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस मामले की एसआईटी से जांच कराने, अल्फा अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने व उसे सील लगाने की मांग की।

सीएमओ डा. अशोक कटारिया ने उक्त अस्पताल को नोटिस भेजकर उक्त अस्पताल के संचालक व प्रबंधक से तीन दिन में जवाब तलब किया है। सीएमओ का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नवंबर में इस अस्पताल के लाइसेंस सस्पेंड होने के बारे में सीएमओ ने बताया कि नवंबर में उक्त अस्पताल के खिलाफ मरीज से अत्याधिक पैसे लेने की शिकायत मिली थी शिकायत पर इस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया था। इस मामले में थाने में एफआईआर भी दर्ज हुई। पुलिस ने जांच के बाद इस अस्पताल पर लगे दोष सिद्ध न होने पर एफआईआर लगा दी थी। इसके आधार पर इस अस्पताल का लाइसेंस बहाल कर दिया गया था।

कानपुर पुलिस ने अल्फा हॉस्पिटल की फाइलें खंगाली
कानपुर के अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के तार मेरठ अल्फा हॉस्पिटल से जुड़े होने पर कानपुर पुलिस सादी वर्दी में अस्पताल पहुंची। पुलिस ने डा. अफजल के बारे में पूछताछ कर जांच पड़ताल की। इसके बाद पुलिस कानपुर लौट गई।
मेडिकल थाना क्षेत्र में मंगल पांडेय नगर में अल्फा हॉस्पिटल है। वर्ष 2022 में हॉस्पिटल को मुजफ्फरनगर के अमित कुमार ने विक्की चौहान व विजय गुप्ता के साथ प्रारंभ किया था। बाद में इनाम, नासिर, परवेज व फरियाद को साझीदार बनाया गया। साथ ही, अन्य डाक्टर भी हॉस्पिटल से जोड़े गए। हॉस्पिटल से डेंटल सर्जन डा. वैभव मुद्गल भी जुड़े हैं। बता दें, मंगलवार को कानपुर में हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के मामले में अमित कुमार व डा. वैभव मुदगल तथा डा. अफजल भी नामजद किया गया है। अल्फा हॉस्पिटल के प्रबंधक सचिन भड़ाना ने बताया कि उनके यहां वर्तमान में डा. अफजल नाम का कोई डाक्टर नहीं है। छह माह पहले की उसको कोई जानकारी नहीं है। दूसरी ओर, जब अमित कुमार से उनके फोन पर संपर्क किया गया तो वह रात तक स्विच ऑफ जाता रहा। चर्चित किडनी कांड में बुधवार को कानपुर नगर से किडनी कांड को लेकर पुलिस की एकटीम सिविल ड्रेस में अल्फा हॉस्पिटल पहुंची पुलिस ने अमित कुमार, डा. वैभव मुदगल व डा. अफजल के बारे में जानकारी जुटाई। इस दौरान कानपुर नगर के रजिस्ट्रेशन नंबर की सफेद रंग की गाड़ी अल्फा हॉस्पिटल के बाहर खड़ी रही। हालांकि प्रबंधक सचिन भड़ाना ने कानपुर पुलिस के आने से इनकार किया है। इसके अलावा मेडिकल थाना पुलिस ने भी अस्पताल में पहुंचकर जांच पड़ताल की मेडिकल थाना प्रभारी सतवीर सिंह अत्री ने बताया कि उनके थाने पर बुधवार को कानपुर पुलिस ने न तो आमद दर्ज कराई है, न ही रवानगी हालांकि मुंडाली थाने की पुलिस एक मुल्जिम से पूछताछ के लिए जरूर अल्फा हॉस्पिटल पहुंची थी।

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