Monday, May 20

मिलजुलकर मनाएं दीपावली, शांति व्यवस्था कायम करने में दें सहयोग, प्रदूषण फैलाने वाली आतिशबाजी से दूर ही रहें तो अच्छा है

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देशभर में गली मोहल्लों से लेकर दुनियाभर में निवास कर रहे भारतवंशियों द्वारा दीपावली और उससे पहले धनतेरस और बाद में गोवर्धन और भाईदूज आदि त्योहार मनाने की खबरें प्राप्त हो रही हैं। कई देशों में दीपावली पर्व वहां की सरकारों द्वारा भारतवंशियों को काफी सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए इसे विशेष पर्व घोषित किया गया है। बताया जाता है कि रावण वध के बाद जब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या पहुंचे थे तो अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई। इसलिए दीपावली रोशनी और अच्छाई के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। हम भी अपने घरों पर दीये जलाने, बिजली की झालरों और फूलों से सजावट के साथ आतिशबाजी चलाते हैं। दोस्तों खुशियां मनाना हम सबका अधिकार है लेकिन हमारे पड़ोसी और हर नागरिक खुशहाल रहे और हमारे किसी काम से किसी को कोई ठेस ना पहुंचे ऐसे प्रयास हम सबको करने होंगे। तभी दीपावली का सही अर्थ उभरकर आता है।
यह बड़े हर्ष की बात है कि तमाम प्रकार की आर्थिक कठिनाईयों और बेरोजगारी के बावजूद इस पर्व पर लोगों द्वारा खरीददारी किए जाने से व्यापारियों के चेहरों पर खुशहाली छाई है वो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। प्रिय दोस्तों हम सभी समझदार और अपने अच्छे बुरे के बारे में खूब जानते हैं। इसलिए किसी को संदेश देने की आवश्यकता नहीं है लेकिन चारो तरफ व्याप्त गंदगी और प्रदूषण से परेशान आम आदमी को और कष्ट प्रदूषण को लेकर ना हो इसलिए जरूरी है कि एनजीटी के आदेशों के तहत हमें आतिशबाजी नहीं छुड़ानी चाहिए और अगर करनी है तो बिना आवाज वाले पटाखे छुड़ा सकते है।
प्रिय पाठकों हर क्षेत्र में अच्छे लोग है तो कुछ असामाजिक तत्व भी सक्रिय होते रहते हैं जो हमारी आपकी खुशियों को प्रभावित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ऐसी समाजविरोधियों का डंक दबा रहे और वो अपनी कुचालों में सफल ना हो और हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वो अपने आसपास की गतिविधियों पर निगाह रखे और कहीं कुछ संदेह नजर आता है तो निकट के पुलिस स्टेशन डीएम एसएसपी समेत बड़े अफसरों को सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी सूचना दें। त्योहार में किसी को भी व्यवधान उत्पन्न करने का अवसर प्राप्त ना होने दें। इन्हीं शब्दों के साथ मैं और मेरा परिवार व हमारे सहयोगी आप सभी को धनतेरस दीपावली गोवर्धन भैयादूज की बधाई देते हुए आग्रह करते हैं कि अपने आसपास रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति भी त्योहार मनाएं इसके लिए उन्हें उपहार नकद मिठाई सम्मान के साथ दें और उनका मान बढ़ाते हुए आत्मीयता कायम करें। यही भगवान श्रीराम के द्वारा दिखाए गए मार्ग और उनकी प्रेरणा का सदुपयोग हो सकता है।

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