मेरठ 25 अगस्त (प्र)। भाइयो सुणो, यो नगर निगम म्हारा नाश करने पै खड़ा…। गाम आलो को पता भी नी, अर इन्नै म्हारे 10 गामों के प्रस्ताव बनाकै बीडीओ को भेज दिये, ताकि ये सब गाम नगर निगम में आ जां हम यो कतई नी होण दें। अर जोर जबरदस्ती करी तो ईंट से ईंट बजा देंगे। रविवार को गगोल गांव में हुई 22 गांवों की पंचायत में इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों के स्वर मुखर हुए। उन्होंने चेतावनी दी इन गांवों को नगर निगम क्षेत्र में मिलाने का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
पंचायत के आयोजक अभिषेक संघी ने बताया कि हाल में नगर निगम ने मेरठ ब्लाक के 10 गांव नगर निगम में मिलाने के लिए खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को एक प्रस्ताव बनाकर भेजा है। यह जानकारी जैसे ही ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया। रविवार को गगोल के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में मेरठ ब्लाकक्षेत्र के 22 गांवों के जिम्मेदार लोगों की पंचायत हुई। पंचायत के दौरान इन 10 गांवों को नगर निगम में मिलाने की कवायद का पुरजोर विरोध किया गया। पंचायत में मेरठ ब्लाक प्रमुख कपिल मुखिया, गजेंद्र मास्टर, महरौली पूर्व प्रधान गंगाराम, गगोल के वर्तमान प्रधान जयविंद्र सिंह, जयवीर सिंह, मनोज कुमार समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
कमेटी बनाकर मंडलायुक्त डीएम से करेंगे मुलाकात
पंचायत में निर्णय लिया गया कि जल्द ही इन गांवों के जिम्मेदार लोगों की एक कमेटी बनाई जाएगी। इसके बाद कमेटी के लोग मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से मिलकर इन गांवों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल नहीं करने की अपील करेंगे।
इन 10 गांवों का भेजा है प्रस्ताव
महरौली, भूड़बराल, मोहिद्दीनपुर, गगोल, गूमी, अलीपुर बलीपुर बाजी, जुर्रानपुर, जलालपुर को नगर निगम में मिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। यह गांव शहर के नजदीक हैं। इसी कारण इन्हें निगम क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
ग्रामीणों का तर्क, निगम में जाने से होंगे ये नुकसान
ग्रामीण क्षेत्र में यदि प्रदेश व केंद्र सरकार कोई विकास कार्य करती है तो सर्किल रेट का चार गुणा पैसा मिलता है। निगम क्षेत्र में यह पैसा सर्किल रेट से दो गुणा मिलता है।
अभी तक मकानों पर कोई हाउस टैक्स नहीं लगता है। निगम क्षेत्र में शामिल होने के बाद हाउस टैक्स देना होगा।
अब बिजली की दरें कम हैं। निगम क्षेत्र में आने के बाद दरें दो से तीन रुपये तक बढ़नी संभव हैं।
नया मकान बनाने के लिए अभी नक्शा पास नहीं कराना होता। निगम क्षेत्र में आते ही नक्शा पास कराना होगा।
ग्राम प्रधान, बीडीसी मेंबर, जिला पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख के पद खत्म हो जाएंगे।
इस त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में तो कोई परिसीमन नहीं हुआ है। परिसीमन का काम पूरा हो चुका है। 2021 में जिस तरह से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए थे। 2025 में भी ऐसे ही होंगे। इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।– नूपुर गोयल, सीडीओ व कार्यवाहक डीएम।
नगर निगम सीमा से लगे 26 गांवों को नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव 2016 में शासन को भेजा था, जो शासन स्तर पर विचाराधीन है। इसी क्रम में खंड विकास अधिकारियों से गांवों के विकास, सुविधाएं सहित कई बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई हैं।- शरद पाल, सहायक नगर आयुक्त ।
नगर निगम ने एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें मेरठ ब्लाक क्षेत्र के 10 गांवों को निगम क्षेत्र में शामिल करने के लिए लिखा है। यह प्रक्रिया 2016 से चल रही है। ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। हम इसकी रिपोर्ट बनाकर नगर निगम को भेज रहे हैं। -वृजेश सिंह, बीडीओ मेरठ।