मेरठ 25 मार्च (प्र)। मेरठ में ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन ने भारत सरकार द्वारा पारित एक वित्त विधेयक के विरोध में प्रदर्शन किया। संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति जनपद मेरठ के तत्वाधान में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से इस अधिनियम को समाप्त करने हेतु एक ज्ञापन सौंपा गया। उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों के पेंशनर्स और कार्यरत कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।
जनपद संयोजक इंजीनियर ए.के. कौशिक ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया यह अधिनियम उसे पेंशनर्स के बीच भेदभाव करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम सरकार की उस नीति के विरुद्ध है जिसके तहत सभी नागरिकों को न्याय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का संकल्प लिया गया है।
कौशिक ने आगे बताया कि इस अधिनियम के प्रावधानों से 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्स को अपूरणीय क्षति होने की संभावना है। उन्होंने याद दिलाया कि सातवें वेतन आयोग ने भी 1 जनवरी 2016 से पहले और उसके बाद सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्स के बीच समानता की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने लागू किया था। ज्ञापन के माध्यम से इस अधिनियम को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षण संघ के अध्यक्ष श्याम सिंह नागर ने एक अन्य मुद्दा उठाया। उन्होंने अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों, कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और यहां तक कि अशासकीय शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी है, लेकिन सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षकों को अभी तक यह सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा प्रदान करने हेतु ज्ञापन देने की बात कही।
