Thursday, April 3

वृंदावन एन्क्लेव व गंगापुरम कालोनी के बिल्डरों ने बंधक प्लाटों के साथ बेच दी पार्क और सड़क की जमीन

Pinterest LinkedIn Tumblr +

मेरठ 02 अप्रैल (प्र)। बिल्डरों ने आंतरिक विकास कार्य के रूप में बंधक रखे गए प्लाटों के साथ सड़क व पार्क की जमीन भी बेच दी। साथ ही ईडब्ल्यूएस, एलआइजी फ्लैट भी बनाए। मामले में मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने गंगानगर थाने में कालोनी वृंदावन एन्क्लेव व गंगापुरम के सभी पार्टनर बिल्डरों के खिलाफ तहरीर दी है।

पहला प्रकरण वृंदावन एन्क्लेव का है। इसके लिए ग्राम अम्हेड़ा आदिपुर के खसरा संख्या 251, 269 पर 15 हजार वर्ग मीटर भूमि पर तलपट मानचित्र अक्टूबर 2023 में स्वीकृत कराया गया था। मेसर्स ग्रेविल कालोनाईजर्स प्रा. लि. के नाम की कंपनी के निदेशकों में सरायकाजी निवासी अशोक सैनी, बदरखा बड़ौत निवासी राजगुरु खोखर व ग्राम दत्तावली गेसूपुर निवासी सुनील कुमार शामिल हैं। इस कालोनी में आंतरिक विकास कार्यों के सापेक्ष प्लाट संख्या चार, 60, 61, 62, 21, व 24 बंधक रखे गए थे। साथ ही ईडब्ल्यूएस व एलआइजी भवनों के निर्माण कराने के लिए जो बैंक गारंटी रखी गई थी, उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। कालोनी के अंदर सड़क, पार्क, नाली, सीवर लाइन का कार्य नहीं हुआ। वहीं ईडब्ल्यूएस व एलआइजी फ्लैट भी नहीं बनाए गए। मुजफ्फरनगर के शकुंतलम कालोनी निवासी फकीर चंद मोघा ने मेडा में शिकायत की थी कि बिल्डरों ने बंधक प्लाट संख्या 60, 61, 62 को बेच दिया है। प्राधिकरण ने इसे खरीदारों के साथ धोखाधड़ी, नियमों का उल्लंघन मानते हुए थाने में तहरीर दी है।

दूसरा प्रकरण गंगापुरम कालोनी का है। इसके लिए खसरा संख्या – 30 पर 13 हजार 850 वर्ग मीटर में तलपट मानचित्र स्वीकृत कराया गया था । मेसर्स दयानंद बिल्डर्स के नाम से इस विकासकर्ता कंपनी के निदेशक रजपुरा गांव निवासी ईश्वरपाल, कुंवरपाल, धर्मपाल व मनोज कुमार सैन हैं। मानचित्र स्वीकृति के समय बाह्य विकास शुल्क की गणना 8.85 लाख रुपये हुई थी। उस समय बिल्डर की ओर से 1.21 लाख रुपये जमा कराए गए थे। बकाया धनराशि की गारंटी के रूप में प्लाट संख्या एक, दो, छह, सात, आठ, नौ, 49, 50, 51, 52, 53, 54 बंधक रखे गए थे। कुछ समय बाद ईश्वरपाल, कुंवरपाल, धर्मपाल ने सुभाष नगर निवासी मनोज सैन को सभी बंधक प्लाटों व कालोनी के प्लाटों को बेचने का अधिकार पत्र (अटार्नी) दे दिया। इसके बाद सभी बंधक प्लाटों को बेच दिया गया। इन्हें बेचने से पूर्व मेडा से मुक्त होने का प्रमाण पत्र नहीं लिया गया । तलपट मानचित्र में स्वीकृत सार्वजनिक सुविधाओं सड़क एवं पार्क की भूमि को भी बेच दिया गया। मनोज सैन ने कालोनी के अंदर विकास कार्यों (नाली, सड़क, सीवर व पार्क) को पूरा नहीं कराया । ईश्वरपाल, कुंवरपाल व मनोज कुमार सैन के खिलाफ तहरीर दी गई है। मेडा सचिव आनंद सिंह ने बताया कि अभी कुछ अन्य प्रकरण पर भी तैयारी की जा रही है।

यह है बंधक प्लाट और बंधक धनराशि का नियम
नियम के अनुसार मानचित्र के अनुरूप आंतरिक विकास कार्य कालोनी में होना चाहिए। यह कार्य सुनिश्चित हो सकें, इसके लिए क्षेत्रफल के अनुपात में संबंधित कालोनी के कुछ प्लाट बंधक रखे जाते हैं, ताकि बिल्डर के डिफाल्टर होने पर उन बंधक प्लाटों को नीलाम किया जा सके । नीलामी से जो धनराशि प्राप्त हो उससे आंतरिक विकास कराया जा सके। वहीं यदि बिल्डर समय से आंतरिक विकास कार्य कराने के बाद बंधक प्लाट को मुक्त करने की मांग करता है तो स्थलीय निरीक्षण करने के बाद उन्हें मुक्त कर दिया जाता है।

जब ये प्लाट प्राधिकरण की ओर से मुक्त किए जाते हैं तब उसकी जानकारी निबंधक कार्यालय को दी जाती है, ताकि बिल्डर उन प्लाटों को बेच सके। साथ ही कालोनी में ईडब्ल्यूएस व एलआइजी फ्लैट बनाने का नियम है, इसके लिए धनराशि बंधक रखनी होती है। समय-समय पर उसका नवीनीकरण कराना होता है। ऐसे फ्लैट के निर्माण व आवंटन के बाद बंधक धनराशि भी मुक्त कर दी जाती है।

गंगानगर थाना प्रभारी अनूप सिंह का कहना है कि मेडा के अधिकारियों की तरफ से दो बिल्डरों के खिलाफ तहरीर मिली है। आरोप है कि बिल्डरों ने धोखाधड़ी से कुछ प्लाट बेच दिए है। इस संबंध में सीओ को रिपोर्ट भेजी गई है। उन्हीं के आदेश पर मुकदमा दर्ज होगा।

वृंदावन एन्क्लेव प्रबंध निदेशक अशोक सैनी का कहना है कि मेडा का आरोप निराधार है। पार्क विकसित हो रहा है। सड़क, पार्क नाली, सीवर लाइन कार्य हो चुका है। ईडब्ल्यूएस व एलआइजी फ्लैट के निर्माण का कार्य चल रहा है। वैसे भी नक्शा पास हुए तीन साल नही हुए हैं, ऐसे में मेडा की यह कार्रवाई समझ से परे है।

Share.

About Author

Leave A Reply