Sunday, April 14

वाह रे सिस्टम: 35 रुपये की जगह 245 रुपये काटा टोल, वाहन चालक परेशान

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बागपत 09 दिसंबर। फास्टैग की व्यवस्था को भले ही वाहन चालकों की सुविधा के लिए बनाया गया हो, लेकिन यह व्यवस्था वाहन चालकों को भारी भी पड़ रही है। जहां टोल के 35 रुपये शुल्क है वहां फास्टैग से 245 रुपये काटे जा रहे हैं। यही नहीं खामी इतनी है कि दुहाई से 70 रुपये टोल शुल्क लगता है। वहां 275 रुपये शुल्क काटा जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह की अवैध उगाही की जा रही है। इसे अवैध उगाही इसलिए कहा जाएगा कि शिकायतकर्ता की शिकायत तक नहीं सुनी जाती है। टोल पर एनएचएआई से बात करने की बात कह दी जाती है और एनएचएआई फास्टैग से संबंधित बैंक के पाले में गेंद डाल देता है। शिकायतकर्ता चक्कर काटकर थक जाता है और फिर कई गुना टोल भरने को मजबूर हो जाता है। कभी भी मनचाह शुल्क काट लिया जाता है। शिकायत कहीं भी कर ली जाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। यही है कि फास्टैग वाहन चालकों की जेब भी ढीली कर रहा है।

ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे पर टोल पर फास्टैग को लेकर बड़ा गोलमाल चल रहा है। यहां मनमर्जी का शुल्क काटने का सिस्टम इन दिनों चल रहा है। वाहन चालक यहां से फास्टैग के माध्यम से निकल जाते हैं, लेकिन तभी उनके मोबाइल पर मैसेज नहीं आता है। टोल शुल्क कटने का मैसेज उन्हें बाद में या फिर अगले दिन मिलता है। जब मोबाइल पर टोल शुल्क का मैसेज पहुंचता है तो वाहन चालक के होश उड़ जाते हैं। मैसेज में 245 रुपये कटे मिले, जबकि वहां 35 रुपये ही कटने थे। कुंडली से बागपत तक 35 रुपये टोल शुल्क लगता है। यहां 35 की बजाय 245 रुपये काटे जा रहे हैं। यही नहीं दुहाई से बागपत तक 70 रुपये टोल है वहां से 275 रुपये काटे जाते हैं। अब 200 रुपये से नीचे टोल ही नहीं काटते हैं। जबकि पूरे एक्सप्रेस वे का इतना टोल देना होता है।

शिकायतकर्ता इसकी शिकायत टोल बूथ पर करते हैं तो वहां सुनवाई नहीं होती है। बड़ौत निवासी संदीप ने बताया कि उसकी गाड़ी दुहाई से प्रतिदिन आती है और फास्टैग से शुल्क कटता है, लेकिन कभी भी मवीकलां टोल पर 275 रुपये काट दिए जाते हैं। जोकि कई गुना अधिक काटा जा रहा है। उन्होंने इसकी शिकायत टोल मैनेजर से लेकर एनएचएआई तक की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। एनएचएआई फास्टैग से संबंधित बैंक के पाले में गेंद डाल देता है। जब बैंक से बातचीत की जाती है तो वह अपने यहां सब कुछ सही बताते हैं। वह फास्टैग को सही बता देते हैं। वह एनएचएआई के टोल का फाल्ट बताते हैं। समाधान किसी भी स्तर से नहीं किया जाता है। उन्हें कई बार टोल के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन समाधान नहीं हुआ। सभी जगह शिकायत भी कर ली. परंतु कोई सुनवाई नहीं।

इसी तरह से न जाने कितने वाहन चालकों के साथ प्रतिदिन इस तरह की मनमर्जी की जा रही है। इस मनमर्जी से टोल प्रबंधन को जहां लाखों रुपये का फायदा पहुंच रहा है वहीं वाहन चालक की जेब ढीली हो रही है। वाहन चालक फास्टैग का रिचार्ज उसी के अनुसार करते हैं, लेकिन जब उनका बैलेंस कम हो जाता है तो फिर उन्हें दोगुना तक भी आगे टोल पर देना पड़ जाता है। वाहन चालक दोहरी मार झेल रहे हैं। स्थिति इतनी खराब है कि टोल पर कोई सुनने वाला नहीं है। वहां कितनी भी शिकायत कर ली जाए, लेकिन समाधान की कोई कड़ी वहां से जुड़ती दिखाई नहीं देगी। आलम यह है कि वाहन चालक से महीने में कई बार इस तरह की कटौती कर दी जाती है। जिससे उसका फास्टैग का बैलेंस गड़बड़ा जाता है। अब सवाल यह है कि आखिर यह अवैध उगाही क्यों की जा रही है? क्यों सुनवाई नहीं हो रही है? वाहन चालक कहां इसकी शिकायत करें?

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