मेरठ 01 अप्रैल (प्र)। शहद की मिठास के पीछे छिपे कड़वे सच की परतें अब खुलने की कगार पर हैं। वफावत गांव स्थित एक शहद फैक्ट्री डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की छापेमारी ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। कार्रवाई के 24 घंटे बाद भी जांच जारी है, जिससे यह मामला साधारण नहीं, बल्कि बड़े स्तर की अनियमितताओं की ओर इशारा कर रहा है।मंगलवार को पुख्ता सूचना के आधारपर पहुंची डीआरआई टीम ने फैक्ट्री परिसर को पूरी तरह अपने कब्जे में लेकर सील कर दिया। किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगा दी गई है।
छापेमारी के दौरान दौराला थाना पुलिस ने मौके पर तैनात रहकर सुरक्षा व्यवस्था संभाली बफावत गांव निवासी दीपक और शैलेंद्र की ओर से गांव के बाहरी क्षेत्र में खेत के बीच इस फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा था। यहां बड़े पैमाने पर शहद का उत्पादन कर देश और विदेश तक सप्लाई की जाती थी। हालांकि, अब इस उत्पादन की गुणवत्ता और प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, डीआरआई को फैक्ट्री में गंभीर अनियमितताओं की सूचना मिली थी। इसी आधार पर दिल्ली से दौराला पहुंची टीम लगातार 24 घंटे से अधिक समय से दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड की पड़ताल और सैंपलिंग में जुटी हुई है। हर पहलू को बारीकी से खंगाला जा रहा है, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी छिप न सके।
बफावत की फैक्ट्री में बनता था शहद देश-विदेश तक होती थी सप्लाई
बफावत गांव की शहद फैक्ट्री डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की कार्रवाई 24 घंटे बाद भी जारी है। टीम फैक्ट्री को सील कर दस्तावेज कब्जे में लेकर मिलावट और केमिकल उपयोग के आरोपों की गहन जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई यहां पहुंची, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में हलचल मची हुई है। डीआरआई भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के जरिए काम करने वाली प्रमुख जांच एजेंसी है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसके जोनल कार्यालय मुंबई, चेन्नई, कोलकाता समेत शहरों में स्थित हैं। यह एजेंसी तस्करी, टैक्स चोरी और नकली उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जानी जाती है।
सूत्रों के अनुसार, फैक्ट्री में बड़े स्तर पर शहद उत्पादन कर सप्लाई की जा रही थी, लेकिन मिलावट और रासायनिक उपयोग की शिकायतों के बाद डीआरआई ने छापा मारा। टीम लगातार सैंपलिंग और रिकॉर्ड की जांच में जुटी है। अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक कुछ भी कहने से इनकार किया है।
शहद या खेल ? गांव में चर्चाओं के बीच सच तलाशती टीम
फिलहाल, अधिकारी जांच पूरी होने तक कुछ भी कहने से बच रहे हैं। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस मीठे कारोबार का असली चेहरा सामने आएगा। इधर, गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री में चावल, चीनी और केमिकल मिलाकर नकली शहद तैयार किया जाता था। साथ ही रासायनिक युक्त अपशिष्ट पानी को पास के तालाब में छोड़े जाने की बात भी सामने आ रही है, जिससे पर्यावरण और पशुओं के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायतें की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब डीआरआई की सख्त कार्रवाई के बाद पूरे मामले के खुलासे की उम्मीद जगी है।
