मेरठ 21 अप्रैल (प्र)। जिला महिला अस्पताल स्थित दिव्यांग मेडिकल बोर्ड में डाक्टरों के समय पर नहीं पहुंचने पर दिव्यांगजन और उनके साथ आए लोगों ने कार्यालय के बाहर हंगामा किया। मेडिकल बोर्ड की व्यवस्था देख रहे कर्मचारियों ने डाक्टरों को फोन किया। करीब दो घंटे देरी से दोपहर 12 बजे डाक्टर पहुंचे। तब लोग शांत हुए और दिव्यांगजन का परीक्षण शुरू हुआ।
सोमवार सुबह 10 बजे से ही काफी दिव्यांगजन और उनके स्वजन दिव्यांग मेडिकल बोर्ड कार्यालय के बाहर जमा हो गए लेकिन बोर्ड के सदस्य निर्धारित समय पर नहीं पहुंचे। कार्यालय में तीन कर्मचारियों के सिवा कोई नहीं था। व्हीलचेयर, बैसाखी के सहारे पहुंचे दिव्यांगजन के लिए बैठने तक का उचित इंतजाम नहीं था। कुछ कुर्सियां पड़ी थीं, जबकि लोगों की संख्या लगभग दोगुनी थी। सुबह 11.30 बजे तक जब कोई डाक्टर नहीं पहुंचा तो दिव्यांगजन और उनके स्वजन ने हंगामा कर दिया।
टीपीनगर की दिव्यांग खुशी, परतापुर की नेहा, और रोहटा से आई सलोनी ने कहा कि घर से अस्पताल तक आना बड़ी चुनौती है। घंटों का इंतजार उनकी तकलीफ और बढ़ा रहा है। कैली से आए सुभाष ने कहा सुबह 10 बजे से भूखे-प्यासे बैठे हैं। पिछले मेडिकल बोर्ड में भी आया था। कुछ जांचें लिख दी थीं।
परतापुर के सुरेंद्र सिंह ने बताया कि दिव्यांग कार्ड बनाने के लिए कई-कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। सुबह 10 बजे कभी भी डाक्टर नहीं मिलते। वहीं, दोपहर 12 बजे के बाद पहुंचे पीएल शर्मा जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. अजय, ईएनटी विशेषज्ञ डा. आलोक ने कहा कि ओपीडी करने के बाद यहां आना होता है। दोपहर एक बजे मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. राशि अग्रवाल पहुंचीं। फिजिशियन डा. अनुराग की ड्यूटी थी, लेकिन उन्हें सुबह वीआइपी ड्यूटी में लगा दिया गया। इसके चलते जिला अस्पताल से फिजिशियन डा. अंकित कुमार दोपहर एक बजे पहुंचे। वह इससे पहले ओपीडी में मरीज देख रहे थे।
एसीएमओ डा. गजेंद्र सिंह का कहना है कि सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक आवेदन फार्म जमा कराए जाते हैं। दोपहर 12 बजे से मेडिकल बोर्ड बैठता है। तीन डाक्टर समय पर आ गए थे। एक डाक्टर की वीआइपी ड्यूटी लगने और दो डाक्टरों की ओपी डी होने के कारण वे देरी से आए थे। डाक्टरों की कमी के चलते ओपीडी भी करनी जरूरी होती है।
