Sunday, April 14

एसपी ने नहाने जा रहे बेकसूर युवाओं को जयकारा लगाने पर क्यों पीटा

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राष्टीय एकता सदभावना भाईचारे को मजबूत करने में भूमिका निभाने में सक्षम धर्म को लेकर हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी संप्रदाय या वर्ग का क्यों ना हो उसकी आस्था और विश्वास चरम पर हमेशा रहता है। क्योंकि उसे लगता है कि इससे एक तो बुरे कर्मो से दूर रहने की ताकत मिलेगी दूसरे लोक परलोक सुधरेगा और जीते जी परिवार में खुशहाली आएगी। शायद इसीलिए हम अनेक मौकों पर गंगा मैया की जय हो हनुमान जी की जय हो भगवान राम की जय हो आदि जयकारे लगाते हैं और इसमें औरों को भी शामिल करते है।
देश में इस समय विशुद्ध रूप से सभी धर्मो को सम्मान देने वालों की सरकार है। उसके बावजूद गंगा मैया की जयकारे लगाने वालों को एसपी द्वारा पीटा जाना और बाद में यह कहना है कि यह हुड़दंग मचा रहे थे कुछ जमता नहीं है। गढ़ गंगा मेेले का अपना अलग महत्व है। दुनियाभर से यहां लोग पूजा करने और नहाने आते हैं तो आसपास के जिलों से श्रद्धालु परिवार सहित बुग्गियों से कई दिन पहले पहुंचते है। ठंड को अपने से दूर रखने के लिए भैंसा बुग्गी दौड़ाते है। जयकारे लगाने के साथ महिलाएं भजन कीर्तन गाती चलती है जिससे भक्तिमय माहौल बनता है।
एक खबर के अनुसार कुछ लोग सड़क पर भैंसा बुग्गी दौड़ा रहे थेे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका तभी कुछ युवा पहुंचे और गंगा मैया की जयकार करने लगे जिसे हुंड़दंग बताते हुए खबर के अनुसार एसपी अभिषेक वर्मा ने पुलिसकर्मियों के साथ उन पर थप्पड़ जड़ दिए। जैसा कि हमेशा ज्यादातर पुलिसकर्मी एकत्र हुए नहीं कि पीड़ित को मारपीट व गाली देकर इतना जलील करते हैं जिसे शब्दों में बखान नहीं कर सकते। यहां भी ऐसा ही हुआ। दूसरी तरफ एएसपी राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि लोग हुड़दंग कर रहे थे। अफसरों और पुलिसकर्मियों ने उन पर कार्रवाई क्यों नही की। सवाल यह है कि हुड़दंग कर रहे थे चालान करते। जनता इस घटना के बारे में जो चर्चा कर रही है उसमें सुनाई देता है कि हुड़दंग करने पर कार्रवाई का शौक है तो जब आंदोलनकारी विभिन्न मुददों को लेकर धरना प्रदर्शन करते हैं और इससे भी ज्यादा हुड़दंग मचाते हैं तो कार्रवाई करने की क्षमता कहां चली जाती है। मेरा मानना है कि केंद्र सरकार हर नागरिक को सुरक्षा की गारंटी दे रही है। जरा सी बातों पर अफसर सस्पेंड हो रहे है। इन बातों को ध्यान में रखकर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए । किसी के साथ मारपीट किया जाना सही नहीं है। अगर इन पीटे युवाओं के समर्थन में भाकियू सड़कों पर उतर आएगी तो आम आदमी उससे प्रभावित होता है। तब हुड़दंग के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता छिप जाती है। जनहित में सीएम साहब को युवाओं को पीटने वाले अफसरों पर कार्रवाई करने के लिए इसकी जांच करानी चाहिए जिससे ऐसी और कोई घटना को कोई और अधिकारी डंडे के जोर पर अंजाम ना दे सके। नागरिक हर कठिन मौकों पर पुलिस के साथ खड़े होते है क्योंकि सुख शांति में ही सबका भला है।

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