नई दिल्ली 09 अगस्त। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 वापस ले लिया। नया आयकर विधेयक 11 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जाएगा। आयकर विधेयक, 2025 को आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेने के लिए लाया गया था। सरकार ने 13 फरवरी, 2025 को यह विधेयक पेश किया था। बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवर समिति की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने की अनुमति मांगी। सदन की मंजूरी के बाद उन्होंने आयकर विधेयक वापस ले लिया।
भाजपा सांसद बैजयंत जय पांडा की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति द्वारा की गई अधिकांश सिफारिशों को शामिल करते हुए, आयकर विधेयक का एक नया संस्करण सोमवार को संसद में पेश किया जाएगा।
विधेयक के विभिन्न संस्करणों से उत्पन्न भ्रम से बचने और सभी परिवर्तनों को शामिल करते हुए एक स्पष्ट और अद्यतन संस्करण प्रदान करने के लिए, आयकर विधेयक का नया संस्करण सदन के विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।
इस विधेयक की समीक्षा के लिए उत्तरदायी संसदीय प्रवर समिति के अध्यक्ष श्री पांडा के अनुसार, पारित होने के बाद, यह नया कानून भारत के दशकों पुराने कर ढांचे को सरल बनाएगा, कानूनी भ्रम को कम करेगा और व्यक्तिगत करदाताओं तथा एमएसएमई को अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने में मदद करेगा।
फरवरी में सदन में पेश किये जाने के बाद विधेयक को तुरंत ही अवलोकन के लिए प्रवर समिति को भेज दिया गया था। संसद के मौजूदा मानसून सत्र के पहले दिन, 21 जुलाई को, नए आयकर विधेयक पर संसदीय पैनल की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की गई। अपनी रिपोर्ट में, पैनल ने परिभाषाओं को सख्त बनाने, अस्पष्टताओं को दूर करने और नए कानून को मौजूदा ढाँचों के अनुरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव दिया है। समिति ने नए कानून में धार्मिक-सह-परमार्थ ट्रस्टों को दिए गए गुप्त चंदे पर कर छूट जारी रखने का भी समर्थन किया, साथ ही सुझाव दिया कि करदाताओं को बिना किसी दंडात्मक शुल्क का भुगतान किए, आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि के बाद भी टीडीएस रिफंड का दावा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
नए विधेयक में सरकार ने गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ) को विशुद्ध रूप से धार्मिक ट्रस्टों द्वारा प्राप्त गुप्त चंदे पर कर लगाने से छूट दी है। हालांकि, किसी ऐसे धार्मिक ट्रस्ट द्वारा प्राप्त दान, जो अस्पताल और शिक्षण संस्थान संचालित करने जैसे अन्य धर्मार्थ कार्य भी करते हों, पर विधेयक के तहत कानून के अनुसार कर लगाया जाएगा।